बैंकों को राहत देने की तैयारी में RBI, फरवरी तक 1.25 लाख करोड़ की तरलता डालेगा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नकदी संकट से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में तरलता की कमी पूरी करने के लक्ष्य को रखते हुए अगले कुछ हफ्तों में अलग-अलग माध्यमों से कुल 1.25 लाख करोड़ रुपये डालने की घोषणा की है। इसमें लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन, डॉलर-रुपया स्वैप और सरकारी बॉन्ड की खरीद भी शामिल है। RBI ने कहा है कि इन उपायों का मकसद वित्तीय बाजारों का सुचारु संचालन बनाए रखना और अचानक बढ़े दबाव को कम करना है।

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लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन से बैंकों को राहत मिलने की उम्मीद है। RBI 30 जनवरी को 90 दिन का वेरिएबल रेट रेपो ऑपरेशन करेगा, जिसकी कुल राशि 25,000 करोड़ रुपये होगी। इसके जरिए बैंक बाजार दरों पर लंबी अवधि के लिए फंड उधार ले सकेंगे। आमतौर पर बैंक ओवरनाइट विंडो से नकदी लेते हैं, लेकिन लंबी अवधि के रेपो से उन्हें बेहतर वित्तीय योजना बनाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अल्पकालिक ब्याज दरों पर दबाव कम होगा और कर्ज वितरण आसान हो सकेगा।

विदेशी मुद्रा बाजार के दबाव को कम करने के लिए RBI डॉलर-रुपया स्वैप ऑक्शन भी करेगा। केंद्रीय बैंक 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर का डॉलर-रुपया बाय-सेल स्वैप ऑक्शन आयोजित करेगा, जिसकी अवधि तीन साल की होगी। इस प्रक्रिया से घरेलू बाजार में रुपये की उपलब्धता बढ़ेगी और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हाल के दिनों में फॉरेक्स ऑपरेशंस के कारण नकदी पर असर पड़ा था, ऐसे में यह कदम बाजार के लिए राहतभरा माना जा रहा है।

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इसके साथ ही RBI सरकारी बॉन्ड की खरीद के जरिए सिस्टम में टिकाऊ लिक्विडिटी डालेगा। केंद्रीय बैंक खुले बाजार से कुल 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा। यह खरीद दो चरणों में होगी 5 फरवरी और 12 फरवरी को 50-50 हजार करोड़ रुपये के ऑक्शन किए जाएंगे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के ऊंचे कैश बैलेंस, टैक्स आउटफ्लो और फॉरेक्स गतिविधियों के चलते हाल में नकदी की स्थिति सख्त हुई थी।

RBI की समझ है कि इन सभी कदमों से लिक्विडिटी सुधरेगी, कर्ज प्रवाह बढ़ेगा और मनी मार्केट की दरों में स्थिरता आएगी। केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि वह हालात पर लगातार नजर बनाए रखेगा और जरूरत पड़ने पर आगे भी जरूरी कदम उठाएगा।

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