महाराष्ट्र की राजनीति में शोक, अटकलें और सत्ता संतुलन को लेकर तेज़ हलचल
नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति एक गहरे शोक और असाधारण राजनीतिक परिस्थितियों से गुजर रही है। उपमुख्यमंत्री रहे Ajit Pawar के आकस्मिक निधन के बाद न केवल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल तेज हो गई है। इस बीच यह चर्चा जोर पकड़ती जा रही है कि दिवंगत उपमुख्यमंत्री की पत्नी Sunetra Pawar को सरकार में वही पद सौंपा जा सकता है। मुंबई पहुंचते ही उनके शपथ ग्रहण की संभावनाओं पर कयास लगाए जाने लगे, लेकिन इसी घटनाक्रम पर पार्टी के वरिष्ठ नेता Sharad Pawar का बयान सामने आने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
शरद पवार का स्पष्ट संदेश: शपथ को लेकर कोई औपचारिक सूचना नहीं
बारामती में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान शरद पवार ने पूरे घटनाक्रम से खुद को अलग रखते हुए कहा कि सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण को लेकर उन्हें किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस बारे में उन्हें भी वही पता है जो समाचार माध्यमों में सामने आया है। शरद पवार का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति में भावनाओं और सत्ता-संतुलन दोनों को साधने की कोशिशें चल रही हैं। उनके बयान ने यह संकेत दिया कि पार्टी के भीतर निर्णय की प्रक्रिया सीमित दायरे में हुई है और सभी वरिष्ठ नेताओं को इसमें शामिल नहीं किया गया।
परिवार की भूमिका पर सवाल और नेतृत्व का निर्णय
प्रेस वार्ता में जब यह पूछा गया कि क्या पवार परिवार का कोई सदस्य संभावित शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहेगा, तो शरद पवार ने कहा कि यह निर्णय पार्टी स्तर पर लिया गया होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस दिशा में पहल की है और उन्होंने जो भी तय किया है, वही आगे बढ़ेगा। इस कथन से यह स्पष्ट हुआ कि यह मामला केवल पारिवारिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संगठनात्मक संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है।
दिवंगत भतीजे की इच्छा और पार्टी एकजुटता का संदर्भ
शरद पवार ने आगे कहा कि उनके दिवंगत भतीजे अजित पवार की इच्छा थी कि पार्टी के दोनों गुट एकजुट हों। उन्होंने बताया कि इस दिशा में पहले से बातचीत चल रही थी और विलय की संभावित तारीख भी तय कर ली गई थी। यह प्रक्रिया फरवरी के मध्य में पूरी होने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही अजित पवार के असमय निधन ने सब कुछ बदल दिया। शरद पवार के अनुसार अब यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि दिवंगत नेता की इच्छा का सम्मान किया जाए और पार्टी की एकता को प्राथमिकता दी जाए।
विमान दुर्घटना के बाद उपजा राजनीतिक शून्य
गौरतलब है कि 28 जनवरी को बारामती क्षेत्र में हुए विमान हादसे में अजित पवार की मृत्यु ने राज्य को झकझोर दिया। इस दुर्घटना के बाद न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी एक बड़ा शून्य पैदा हो गया। उपमुख्यमंत्री के रूप में अजित पवार की भूमिका महत्वपूर्ण थी और उनके जाने के बाद कैबिनेट में संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौती बन गया। इसी पृष्ठभूमि में पार्टी के एक वर्ग ने यह मांग उठाई कि सुनेत्रा पवार को वही जिम्मेदारी सौंपी जाए, जिससे न केवल सरकार की निरंतरता बनी रहे बल्कि दिवंगत नेता के प्रति सम्मान भी व्यक्त हो।
देवेंद्र फडणवीस सरकार और संभावित शपथ
सूत्रों के अनुसार, राज्य की वर्तमान सरकार में नेतृत्व कर रहे Devendra Fadnavis के साथ इस मुद्दे पर विचार-विमर्श हुआ है। पार्टी के अंदर यह तर्क दिया जा रहा है कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से राजनीतिक स्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और शरद पवार के बयान ने इस बात को और स्पष्ट कर दिया है कि अंतिम फैसला अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
एनसीपी के भीतर मतभेद और रणनीति
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ नेताओं का मानना है कि भावनात्मक आधार पर लिया गया निर्णय पार्टी के लिए सहानुभूति ला सकता है, वहीं कुछ का तर्क है कि नेतृत्व चयन पूरी तरह संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक रणनीति के आधार पर होना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और एकता की चुनौतियों को फिर से उजागर कर दिया है।
राजनीतिक भविष्य पर असर
सुनेत्रा पवार को लेकर चल रही चर्चाओं ने यह साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति आने वाले दिनों में बड़े बदलावों से गुजर सकती है। शरद पवार का संतुलित और दूरी बनाए रखने वाला बयान इस बात का संकेत है कि वे इस संवेदनशील समय में किसी भी जल्दबाजी से बचना चाहते हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व पर यह दबाव भी है कि वह दिवंगत नेता की विरासत, जनभावनाओं और प्रशासनिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाए।
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