बजट चर्चा के दौरान डेटा, किसान और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल, सरकार से पूरी जानकारी रखने की मांग

वैश्विक अस्थिरता का हवाला

नई दिल्ली, 11 फ़रवरी (हि.स.)। Loksabha में बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया तेज़ी से स्थिरता से अस्थिरता की ओर बढ़ रही है। यूक्रेन में युद्ध, गाजा में संघर्ष, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और ईरान से जुड़ी आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को खतरनाक बना दिया है। उनका कहना था कि जब पूरी दुनिया अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर रही है, तब भारत को अपने बुनियादी हितों की रक्षा और भी मजबूती से करनी चाहिए थी।

भारत की ताकतें: लोग, डेटा और खाद्य सुरक्षा

राहुल गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके 1.4 अरब लोग हैं, जो ऊर्जा और प्रतिभा से भरे हैं। दूसरी ताकत इन लोगों से तैयार होने वाला विशाल डेटा भंडार है। उन्होंने कहा कि आज के समय में डेटा ही नई अर्थव्यवस्था का आधार है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उसी पर टिकी है। तीसरी बड़ी ताकत हमारे किसान और मजदूर हैं, जो देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। ऐसे समय में इन तीनों को बचाना और मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोजगार का संकट

राहुल गांधी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दौर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काम कर रहे लाखों पेशेवरों के सामने भविष्य को लेकर चिंता है। कई तरह की नौकरियां खत्म हो सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बजट में इस चुनौती से निपटने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की।

Donald Trump और Narendra Modi की बातचीत के बाद हुई डील

राहुल गांधी ने कहा कि फरवरी 2026 में ट्रंप और मोदी की बातचीत के बाद इस अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा हुई। उनके अनुसार अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर कुछ टैरिफ कम करने की बात कही, लेकिन बदले में भारत ने ऐसी शर्तें मान लीं जो लंबे समय में नुकसानदेह हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा भारतीय डेटा पर नियंत्रण का है।

डेटा और डिजिटल नियंत्रण पर सवाल

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने डेटा को पर्याप्त सुरक्षा के बिना विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया। डेटा को देश के भीतर रखने की अनिवार्यता कमजोर हुई है और डिजिटल व्यापार के नियमों पर भारत का नियंत्रण घटा है। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में नीतिगत फैसलों पर बाहरी प्रभाव बढ़ सकता है।

टैरिफ और उद्योग पर असर

राहुल गांधी ने कहा कि टैरिफ ढांचे में बड़ा असंतुलन पैदा हुआ है। उनके अनुसार भारतीय टैरिफ बढ़े हैं, जबकि अमेरिकी टैरिफ लगभग समाप्त हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे वस्त्र उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है और गुड़गांव जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में कारखानों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा।

किसानों के लिए खतरे की आशंका

उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी बड़े कृषि उत्पाद सस्ते दामों पर भारत में आए तो छोटे किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों के उदाहरण देते हुए उन्होंने आशंका जताई कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता

राहुल गांधी ने कहा कि समझौते के बाद भारत की ऊर्जा खरीद से जुड़ी स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भविष्य में किन देशों से तेल खरीदा जाए, इस पर भी बाहरी दबाव बढ़ सकता है, जो राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है।

सदन में पूरी जानकारी रखने की मांग

राहुल गांधी ने इस समझौते को एकतरफा बताते हुए सरकार से मांग की कि इसकी सभी शर्तें और विवरण संसद के सामने रखे जाएं। उन्होंने कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि किन बातों पर सहमति बनी है और उसका असर आम नागरिकों पर कैसे पड़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को किसी अन्य देश के बराबर रखकर नहीं देखा जाना चाहिए।

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