फ्यूल कंट्रोल स्विच लॉक न होने की शिकायत के बाद पूरे बेड़े की दोबारा जांच, एक विमान की उड़ान पर रोक
नई दिल्ली। देश की प्रमुख विमानन कंपनी एअर इंडिया ने अपने सभी बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच की व्यापक और गहन तकनीकी जांच शुरू कर दी है। यह कदम लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से बेंगलुरु के लिए आई एक उड़ान में सामने आई तकनीकी खामी के बाद उठाया गया है, जिसमें फ्यूल कंट्रोल स्विच के ठीक से लॉक न होने की शिकायत दर्ज की गई थी। संबंधित विमान में उस समय लगभग 200 यात्री सवार थे। हालांकि उड़ान सुरक्षित तरीके से पूरी हुई, लेकिन रिपोर्ट सामने आते ही विमान को एहतियातन सेवा से हटा दिया गया।
लंदन–बेंगलुरु उड़ान से सामने आई तकनीकी समस्या
एयरलाइन सूत्रों के अनुसार, यह विमान रविवार को लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से रवाना हुआ था और सोमवार सुबह बेंगलुरु पहुंचा। उड़ान के बाद पायलट ने तकनीकी जांच के दौरान फ्यूल कंट्रोल स्विच में असामान्य स्थिति की जानकारी दी। बताया गया कि स्विच अपनी निर्धारित स्थिति में ठीक से लॉक नहीं हो रहा था, जो उड़ान सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय माना जाता है। इस सूचना के मिलते ही तकनीकी विभाग को सतर्क कर दिया गया और विमान की आगे की सभी उड़ानों पर तत्काल रोक लगा दी गई।
पायलटों को भेजा गया आधिकारिक संदेश
एअर इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मनीष उप्पल ने बोइंग 787 विमान उड़ाने वाले सभी पायलटों को आधिकारिक ईमेल भेजकर इस निर्णय की जानकारी दी। ईमेल में कहा गया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी संभावित जोखिम को पूरी तरह समाप्त करना कंपनी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी कारण पूरे ड्रीमलाइनर बेड़े में फ्यूल कंट्रोल स्विच की दोबारा जांच का निर्णय लिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी विमान तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित हैं।
पूरे बेड़े पर जांच, 32 ड्रीमलाइनर रडार पर
वर्तमान में एअर इंडिया के बेड़े में कुल 32 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान शामिल हैं। इन सभी विमानों की चरणबद्ध तरीके से जांच की जा रही है। तकनीकी विशेषज्ञ फ्यूल कंट्रोल स्विच की लॉकिंग प्रणाली, उससे जुड़े यांत्रिक हिस्सों और नियंत्रण तंत्र की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं यह समस्या किसी एक विमान तक सीमित है या फिर यह किसी व्यापक तकनीकी खामी की ओर संकेत करती है।
अहमदाबाद विमान हादसे के बाद बढ़ी अतिरिक्त सतर्कता
फ्यूल कंट्रोल स्विच पर विशेष ध्यान इसलिए भी दिया जा रहा है, क्योंकि जून महीने में अहमदाबाद में हुए बोइंग 787-8 विमान हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ईंधन आपूर्ति से जुड़ी गंभीर समस्या की बात सामने आई थी। उस दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, टेक-ऑफ के तुरंत बाद विमान की ईंधन आपूर्ति बाधित हो गई थी। इसी कारण से अब फ्यूल कंट्रोल सिस्टम को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।
पहले भी हो चुकी है जांच, फिर क्यों उठे सवाल
अहमदाबाद हादसे के बाद एअर इंडिया ने पिछले वर्ष भी फ्यूल कंट्रोल स्विच की जांच कराई थी। उस समय कंपनी ने दावा किया था कि सभी विमानों में यह प्रणाली मानकों के अनुरूप पाई गई है। इसके बावजूद अब लंदन–बेंगलुरु उड़ान में आई ताजा तकनीकी शिकायत ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं संकेत देती हैं कि जांच प्रक्रिया को और अधिक कठोर तथा पारदर्शी बनाने की जरूरत है।
नियामक एजेंसियों की नजर, रिपोर्ट का इंतजार
इस पूरे मामले पर नागरिक उड्डयन से जुड़ी नियामक एजेंसियां भी करीबी नजर बनाए हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एअर इंडिया से विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि फ्यूल कंट्रोल स्विच में आई समस्या का मूल कारण क्या था और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए कौन से सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे के दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।
यात्रियों की सुरक्षा पर असर और कंपनी की जिम्मेदारी
हालांकि इस घटना में किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उड़ान सुरक्षित रही, लेकिन ऐसे तकनीकी मामलों का सीधा असर यात्रियों के भरोसे पर पड़ता है। विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एअर इंडिया ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक सभी तकनीकी पहलुओं पर पूरी तरह संतोषजनक स्थिति नहीं बन जाती, तब तक संबंधित विमान को दोबारा उड़ान की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आगे की राह और संभावित असर
विमानन जानकारों का कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की प्रणालीगत खामी सामने आती है, तो इसका असर न केवल एअर इंडिया बल्कि अन्य विमानन कंपनियों पर भी पड़ सकता है, जो इसी प्रकार के विमानों का संचालन कर रही हैं। ऐसे में यह जांच आने वाले समय में विमानन सुरक्षा मानकों को और सख्त बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल, एअर इंडिया की ओर से यही कहा गया है कि सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद ही विमानों को दोबारा सेवा में शामिल किया जाएगा। कंपनी ने यात्रियों से भी भरोसा बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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