लगातार बारिश-बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, गांवों में कैद हुए लोग; वहीं तेज हवाओं से दिल्ली-एनसीआर की हवा में मामूली राहत

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड के चमोली जिले में मंगलवार दोपहर से बुधवार सुबह तक हुई लगातार बारिश और बर्फबारी ने पूरे जनजीवन को ठप कर दिया। ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फ जमने से जिले के 77 से अधिक गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे का संकट खड़ा हो गया है और कई जगह पानी भरने तक में दिक्कतें सामने आ रही हैं।

बारिश और बर्फबारी का सिलसिला मंगलवार दोपहर बाद शुरू हुआ, जो पूरी रात जारी रहा। बुधवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे बादल छंटने लगे और कुछ समय के लिए चटख धूप खिली, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, देर शाम एक बार फिर छिटपुट बादल छा गए, जिससे लोगों में आशंका बनी हुई है कि मौसम फिर बिगड़ सकता है।

जिले के सीमांत क्षेत्र ज्योतिर्मठ के आसपास के करीब 36 गांवों पर बर्फबारी का सबसे ज्यादा असर देखा गया है। इसके अलावा चमोली, पोखरी, गैरसैंण, थराली, कर्णप्रयाग और नंदानगर क्षेत्रों के कई गांव भी बर्फ की चादर में ढंक गए हैं। हालांकि ज्योतिर्मठ क्षेत्र के कुछ सीमांत गांवों से लोग शीतकालीन प्रवास के तहत पहले ही निचले इलाकों में चले गए थे, लेकिन जहां लोग मौजूद हैं वहां बर्फबारी ने रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने हालात की गंभीरता की ओर प्रशासन का ध्यान दिलाया है। बंड विकास संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है। सड़कों के बंद होने से जरूरी सामग्री की आपूर्ति रुक गई है और ग्रामीण इलाकों में दिक्कतें लगातार बढ़ रही हैं। वहीं रामणी गांव के पूर्व प्रधान सूरज पंवार ने बताया कि सड़कों पर इतनी फिसलन है कि छोटे वाहन भी नहीं चल पा रहे हैं, जिससे गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से कट गया है।

बर्फबारी का सबसे बड़ा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ा है। जिले में हाईवे सहित कुल सात प्रमुख सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं। ज्योतिर्मठ-मलारी हाईवे, ज्योतिर्मठ-बदरीनाथ हाईवे, ज्योतिर्मठ-औली मोटर मार्ग, गोपेश्वर-चोपता हाईवे, रामणी-पैरी सड़क, छुरागाड़-सुतोल-कनोल सड़क और घेस-बलाण सड़क पर बर्फ की मोटी परत जम गई है। इन मार्गों के बंद होने से न सिर्फ स्थानीय लोगों की आवाजाही रुकी है, बल्कि आपात सेवाओं और प्रशासनिक पहुंच पर भी असर पड़ा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हैं। कई गांवों में लोग घरों के भीतर ही कैद होकर रह गए हैं। पशुपालक वर्ग सबसे ज्यादा परेशान है क्योंकि मवेशियों के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो गया है। बर्फ से ढंके रास्तों पर न तो चारा पहुंच पा रहा है और न ही पशुओं को बाहर निकालना संभव हो पा रहा है। इसके साथ ही कई इलाकों में पानी के स्रोत जमने से पेयजल संकट की स्थिति भी बन रही है।

प्रशासन की ओर से सड़कों को खोलने के प्रयास जारी हैं, लेकिन लगातार बदलते मौसम के कारण मशीनों को ऊंचाई वाले इलाकों तक पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। साथ ही सीमांत और संवेदनशील गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके।

चमोली ही नहीं, बल्कि कश्मीर घाटी और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी बारिश और बर्फबारी का असर देखा गया है। पहाड़ी इलाकों में जहां बर्फबारी ने ठंड बढ़ा दी है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में मौसम में बदलाव का असर वायु गुणवत्ता पर भी पड़ा है।

राजधानी दिल्ली में बीते दिनों चली तेज हवाओं ने प्रदूषण को काफी हद तक धो दिया है। बुधवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 255 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में जरूर है, लेकिन मंगलवार की तुलना में इसमें 81 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि मौसम में आए बदलाव से राजधानी की हवा को थोड़ी राहत मिली है।

हालांकि दिल्ली-एनसीआर के अन्य इलाकों में स्थिति एक जैसी नहीं रही। एनसीआर में गुरुग्राम की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 267 दर्ज किया गया। नोएडा में यह आंकड़ा 217 रहा, जबकि गाजियाबाद में 267 और ग्रेटर नोएडा में 189 दर्ज किया गया। इन सभी क्षेत्रों में हवा खराब श्रेणी में बनी हुई है। इसके उलट फरीदाबाद में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 136 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में आता है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में चल रही तेज हवाओं का संयुक्त असर उत्तर भारत के मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। जहां पहाड़ों में जनजीवन ठहर सा गया है, वहीं मैदानी इलाकों में हवा की गुणवत्ता में अस्थायी सुधार देखने को मिल रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हवाओं की रफ्तार कमजोर पड़ी तो प्रदूषण का स्तर एक बार फिर बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर, चमोली जिले में बर्फबारी ने एक ओर जहां प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ा दिया है, वहीं दूसरी ओर आम जनजीवन के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। सड़कों के खुलने और मौसम के स्थिर होने तक हालात सामान्य होने की संभावना कम ही नजर आ रही है। प्रशासन, स्थानीय संगठन और ग्रामीण समुदाय मिलकर इस प्राकृतिक चुनौती से निपटने की कोशिश कर रहे हैं।

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