पर्व पर 8 लाख 78 हजार 616 श्रद्धालुओं ने किया दर्शन पूजन, गौवंश संरक्षण का संदेश
वाराणसी, 16 फरवरी (हि.स.)। महाशिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस वर्ष एक विशेष पहल की शुरुआत की, जिसने श्रद्धालुओं और धर्माचार्यों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। नंदी आराधना नाम से शुरू किए गए इस नवाचार का उद्देश्य परंपरा और संरक्षण को एक साथ जोड़ना है। मंदिर प्रशासन के अनुसार यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि गौवंश की सेवा और सुरक्षा के व्यापक संदेश को भी समाज तक पहुंचाने का प्रयास है।
प्रदोष परंपरा से प्रेरित नई पहल
न्यास द्वारा अपनाए गए नवाचारों में नंदी आराधना प्रमुख रूप से शामिल है। धाम में स्थित नंदी की प्रतिमा पर प्रत्येक प्रदोष तिथि में अभिषेक की परंपरा पहले से रही है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए महाशिवरात्रि पर्व से मंदिर प्रबंधन ने अपने अधीन संचालित संकटहरण हनुमान मंदिर गौशाला, बेनीपुर सारनाथ में इस पहल का विस्तार किया। यहां नंदीश्वर के प्रतीक रूप में गौवंश की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
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गौशाला में पूजन और पौष्टिक आहार
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने गौशाला पहुंचकर नंदी महाराज के रूप में बछड़े का विधिवत पूजन किया। पूजन के बाद उसे गुड़, चना और चारा जैसे पौष्टिक आहार खिलाए गए। न्यास का कहना है कि इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि श्रद्धा केवल प्रतीकात्मक न रहे, बल्कि जीवित गौवंश की सेवा और संरक्षण में भी झलके। सजावट, आरती और सत्कार के साथ इस कार्यक्रम को उत्सव का रूप दिया गया।
संरक्षण को अभियान बनाने की कोशिश
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। इसके पीछे नंदी संरक्षण का एक लक्षित अभियान भी चलाया जाएगा। आधुनिक समय में गौवंश के संरक्षण को लेकर जो चुनौतियां हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए समाज की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। न्यास ने सुधीजनों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई रचनात्मक और व्यावहारिक सुझाव हों तो वे ईमेल के माध्यम से साझा करें, ताकि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। बताया गया कि पर्व के दूसरे दिन सोमवार को रात्रि 12 बजे से शाम 5 बजे तक 2 लाख 41 हजार 007 श्रद्धालुओं ने बाबा का दर्शन पूजन किया। वहीं पूरे महाशिवरात्रि पर्व पर कुल 8 लाख 78 हजार 616 श्रद्धालु धाम पहुंचे। इतनी बड़ी संख्या में आए भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए थे।
आस्था और व्यवस्थापन का संगम
धार्मिक उत्साह के बीच मंदिर न्यास द्वारा शुरू की गई नई पहल को व्यवस्थापन की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। श्रद्धालुओं को परंपरा से जोड़ते हुए सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देना इस आयोजन की विशेषता रहा। नंदी आराधना के माध्यम से मंदिर प्रशासन ने यह संकेत दिया कि आस्था के साथ-साथ संरक्षण और सेवा को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।
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