शिव भक्ति की महा रात्रि : मंत्र, अभिषेक और श्रद्धा से खुलते हैं सुख-समृद्धि के द्वार
महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित वह पावन रात्रि है, जब भक्ति, साधना और श्रद्धा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और मंत्र जाप कई गुना फल देता है। भक्त दिनभर उपवास रखते हैं, शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और रात भर जागकर भगवान का स्मरण करते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आंतरिक शक्ति को जागृत करने का अवसर भी माना जाता है।
आइए विस्तार से जानते हैं व्रत की पद्धति, पूजन सामग्री, समस्या अनुसार उपाय और वह कथा जो इस पर्व को और भी विशेष बनाती है।
व्रत की शुरुआत कैसे करें
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक रहें, फलाहार करें या श्रद्धानुसार निर्जल व्रत भी रखा जाता है। शिव मंदिर जाकर जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। रात्रि में जागरण और चार प्रहर पूजा का विशेष महत्व है।
पूजा में क्या चढ़ाएं
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित किए जाते हैं। हर अर्पण के साथ शिव नाम लेने से भक्ति और गहरी होती है।
समस्या अनुसार उपाय और मंत्र
विवाह और प्रेम संबंध
शिव-पार्वती को आदर्श दंपति माना जाता है। शिवलिंग पर दूध चढ़ाकर
ॐ पार्वतीपतये नमः
का जाप करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आने की मान्यता है।
आर्थिक परेशानियां
जल में तिल मिलाकर अभिषेक करें और
ॐ नमः शिवाय
का 108 बार जप करें। इसे समृद्धि का मार्ग खोलने वाला माना गया है।
रोग और संकट
महामृत्युंजय मंत्र का जाप स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है। श्रद्धालु दीप जलाकर रोग मुक्ति की कामना करते हैं।
करियर और उन्नति
गंगाजल अर्पित कर
ॐ नमो भगवते रुद्राय
का जप आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है।
महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। एक अन्य कथा के अनुसार एक शिकारी जंगल में शिकार की तलाश में भटक गया। रात होने पर वह एक पेड़ पर चढ़ गया, जिसके नीचे शिवलिंग था। अनजाने में वह पूरी रात जागता रहा और पेड़ की पत्तियां नीचे गिरती रहीं, जो शिवलिंग पर चढ़ती गईं। इस अनजाने पूजन और जागरण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष प्रदान किया। इस कथा का संदेश है कि सच्ची भावना से किया गया छोटा सा कार्य भी बड़ा फल दे सकता है।
चार प्रहर पूजा क्यों खास
रात को चार भागों में विभाजित कर हर प्रहर में अभिषेक, आरती और मंत्र जाप करने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और भक्त को विशेष पुण्य मिलता है।
भक्ति का मूल मंत्र
महाशिवरात्रि का सार यही है कि मन को शांत रखकर शिव का स्मरण किया जाए। श्रद्धा, संयम और विश्वास के साथ किया गया पूजन ही सबसे बड़ा उपाय है।
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