नदी-प्रधान शहरों में जलमार्ग आधारित सार्वजनिक परिवहन एक प्रभावी विकल्प, भारत के शहरी परिवहन के भविष्य को नई दिशा दे रही है कोच्चि वाटर मेट्रो

कोच्चि से सुदेश गौड़

भारत के शहरी परिवहन परिदृश्य में यदि किसी परियोजना ने नई कल्पना और दूरदृष्टि का परिचय दिया है तो वह है कोच्चि वाटर मेट्रो। कोच्चि वाटर मेट्रो भारत की पहली वाटर मेट्रो प्रणाली है जो समुद्र, बैकवॉटर और द्वीपों से घिरे शहर कोच्चि के लिए केवल एक परिवहन व्यवस्था नहीं, बल्कि विकास की नई धारा है। इसे कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है और यह कोच्चि मेट्रो की एक प्रभावी फीडर सेवा के रूप में कार्य कर रही है। प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो भोपाल के सौजन्य से केरल के दौरे पर आए मध्य प्रदेश के पत्रकारों ने वाटर मेट्रो का दौरा किया।

25 अप्रैल 2023 को हुआ उद्घाटन, अगले दिन से शुरू हुई सेवा

कोच्चि वाटर मेट्रो का उद्घाटन 25 अप्रैल 2023 को हुआ और 26 अप्रैल से इसकी नियमित यात्री सेवा शुरू हो गई। प्रारंभिक चरण में हाई कोर्ट–वायपिन मार्ग पर सेवा आरंभ हुई, जिसने यह साबित कर दिया कि जलमार्ग भी आधुनिक शहरी परिवहन का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। जिस शहर में सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक और सीमित भूमि परिवहन एक चुनौती बन चुका था, वहां जलमार्गों का उपयोग एक दूरदर्शी समाधान के रूप में सामने आया है।

पहले कई द्वीपों से शहर तक पहुंचने में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लगता था। अब जलमार्ग के माध्यम से यही दूरी मात्र 20 से 30 मिनट में तय हो जाती है। इससे रोजगार, शिक्षा और व्यापार से जुड़े अवसरों तक लोगों की पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो गई है।

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water metro Photograph: (PC: Sudesh Gaur)

76 किलोमीटर के नेटवर्क पर विकसित हो रहा व्यापक जलमार्ग तंत्र

इस परियोजना की परिकल्पना अत्यंत व्यापक है। पूरी योजना के तहत लगभग 76 किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क पर 16 मार्ग और 38 टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं। यह नेटवर्क कोच्चि के आसपास स्थित लगभग दस प्रमुख द्वीपों को मुख्य शहर से जोड़ेगा।

इन मार्गों पर आधुनिक इलेक्ट्रिक हाइब्रिड नौकाएं संचालित की जा रही हैं। ये नौकाएं यात्रियों को आरामदायक और तेज़ यात्रा उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। प्रदूषण रहित और ऊर्जा दक्ष यह प्रणाली भविष्य के टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

प्रतिदिन हजारों यात्री उठा रहे सेवा का लाभ

वर्तमान में प्रतिदिन लगभग सात हजार यात्री कोच्चि वाटर मेट्रो सेवा का उपयोग कर रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। सप्ताहांत के दिनों में यात्रियों की संख्या बढ़कर 13 हजार से 14 हजार तक पहुंच जाती है।

पहले जिन द्वीपों के लोगों को शहर तक पहुंचने में लंबा समय लगता था, वे अब कुछ ही मिनटों में अपनी मंजिल तक पहुंच पा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़े अवसर अब इन द्वीपों के लोगों के लिए पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गए हैं।

भविष्य में जब सभी 16 मार्ग पूरी तरह शुरू हो जाएंगे तो यात्रियों की संख्या प्रतिदिन लगभग 34 हजार तक पहुंचने का अनुमान है। इस प्रकार वाटर मेट्रो ने केवल दूरी ही कम नहीं की है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दूरी को भी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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water metro Photograph: (PC: Sudesh Gaur)

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा

आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जलमार्ग के माध्यम से तेज और सुगम संपर्क के कारण पर्यटन को नया प्रोत्साहन मिला है। फोर्ट कोच्चि और मट्टनचेरी जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों तक पहुंच अब अधिक आसान हो गई है, जिससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या का लाभ स्थानीय व्यापारियों, होटल उद्योग और छोटे व्यवसायों को भी मिल रहा है। इसके साथ ही टर्मिनलों के संचालन, नौकाओं के रखरखाव और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के कारण स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

नदी-प्रधान शहरों के लिए प्रेरक मॉडल

कोच्चि वाटर मेट्रो ने यह भी सिद्ध किया है कि भारत के तटीय और नदी-प्रधान शहरों में जलमार्ग आधारित सार्वजनिक परिवहन एक प्रभावी विकल्प बन सकता है। यदि इस मॉडल को अन्य शहरों में भी अपनाया जाए तो शहरी यातायात की समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

दरअसल कोच्चि वाटर मेट्रो आधुनिक भारत की उस सोच का प्रतीक है जिसमें विकास, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार एक साथ आगे बढ़ते हैं। यह परियोजना केवल कोच्चि के द्वीपों को नहीं जोड़ रही, बल्कि भारत के शहरी परिवहन के भविष्य को भी एक नई दिशा दे रही है।

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