भारत की अंतरिक्ष ताकत में बड़ा इजाफा, अन्वेषा स्पाई सैटेलाइट लॉन्च
श्रीहरिकोटा। सोमवार सुबह इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) ने 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से PSLV-C62/EOS-N1 मिशन लॉन्च किया। इस मिशन के तहत अन्वेषा स्पाई सैटेलाइट और 14 अन्य को-पैसेंजर सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा गया है।
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अन्वेषा सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह एक अत्याधुनिक खुफिया (स्पाई) सैटेलाइट है, जो दुश्मन की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने में सक्षम है। यह सैटेलाइट छिपे हुए लोगों की भी तस्वीर ले सकती है जैसे झाड़ियों, जंगलों और बंकरों में छिपे दुश्मनों की भी साफ तस्वीरें ले सकता है।
600 किलोमीटर ऊंचाई से निगरानी
अन्वेषा को सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit - SSO) में करीब 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात किया गया है। इस ऊंचाई से यह धरती के किसी भी हिस्से और जगह की हाई-रिजॉल्यूशन में तस्वीरें भेज दे सकता है।
इस मिशन में पूरे 15 सैटेलाइट्स लॉन्च किए गए हैं, जिनमें
- 7 भारतीय
- 8 विदेशी सैटेलाइट शामिल हैं।
हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस के भारतीय सैटेलाइट्स में करीब 7 सैटेलाइट हैं। विदेशी सैटेलाइट्स फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के हैं।
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ISRO का पहला मिशन 2026
EOS-N1 मिशन ISRO का साल 2026 का पहला सैटेलाइट लॉन्च मिशन है। इसे न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा ऑपरेट किया गया, जो ISRO की कॉमर्शियल शाखा है। यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष जगहों के लिए भी अच्छा है, क्योंकि यह पहली बार है कि किसी भारतीय प्राइवेट कंपनी ने PSLV मिशन में इतनी बड़ी भागीदारी की है।
HRS तकनीक से लैस है अन्वेषा
अन्वेषा सैटेलाइट हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) तकनीक पर काम करता है। यह तकनीक रोशनी के सैकड़ों सूक्ष्म रंगों को पहचान लेती है, जबकि सामान्य कैमरे केवल कुछ ही रंग पकड़ पाते हैं।
सैटेलाइट इस तकनीक से यह पहचान सकता है कि जमीन पर मौजूद चीज़ असल में क्या है:
- मिट्टी का प्रकार
- पेड़-पौधों की स्थिति
- इंसानी गतिविधियां
- हथियार या सैन्य उपकरण
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यानी यह किसी सुपर स्कैनर के जैसे है है, जो हर चीज़ की पहचान उसकी अलग चमक से कर सकता है।
- डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ी ताकत
- सेना के लिए अन्वेषा सैटेलाइट बेहद फायदेमंद साबित होगा। इसके द्वारा
- यह पता लगाया जा सकता है कि किसी इलाके से टैंक गुजर सकता है या नहीं
- दुश्मन के जवान झाड़ियों या जंगलों में छिपे हैं या नहीं
- नदी के नीचे छिपे हथियारों की पहचान
- सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन की मूवमेंट पर नजर
- 3D इमेज और सिमुलेशन की मदद से सेना सही अपनी रणनीति और रूट्स तैयार कर पाएगा ।
PSLV की 64वीं उड़ान
PSLV रॉकेट की यह 64वीं उड़ान थी। दुनिया की सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल्स PSLV का नाम गिना जाता है। इससे पहले इसी रॉकेट से
- चंद्रयान-1
- मंगलयान
- आदित्य-L1 जैसे मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं।
PSLV का पिछला मिशन PSLV-C61 था, जिसमें EOS-09 सैटेलाइट लॉन्च किया गया था। जबकि तकनीकी कारणों से वह मिशन पूरी तरह असफल रहा।
अन्वेषा: HySIS का अपग्रेडेड वर्जन
29 नवंबर 2018 भारत ने को अपनी पहली हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट HySIS लॉन्च की थी, जिसका वजन 380 किलो था।
अन्वेषा उसी का अपग्रेडेड वर्जन है और इसमें ज्यादा उन्नत स्पेक्ट्रल क्षमता है। अब तक अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान, इटली और पाकिस्तान भी ऐसी तकनीक वाले सैटेलाइट लॉन्च कर चुके हैं।
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