विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में परंपरागत विधि से पूजन, शिप्रा घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब

उज्जैन, 15 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति का पावन पर्व गुरुवार को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महाकाल का तिल के तेल से विशेष अभिषेक किया गया और तिल्ली के लड्डू व तिल से बने पकवानों का महाभोग अर्पित किया गया। तड़के सुबह मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन आरंभ हुआ और पूरा मंदिर परिसर भक्ति और आस्था के वातावरण से सराबोर नजर आया।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार हुआ विशेष पूजन

महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर हुआ था, लेकिन पर्व काल गुरुवार से प्रारंभ माना गया। इसी कारण मकर संक्रांति का विशेष पूजन आज संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि उज्जैन में किसी भी बड़े पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल के दर्शन और पूजन से ही होती है और इसी परंपरा के तहत मकर संक्रांति का पर्व भी सबसे पहले महाकालेश्वर मंदिर में मनाया गया।

तिल के उबटन और पंचामृत से भगवान का अभिषेक

तड़के लगभग चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का तिल के उबटन से स्नान कराया गया। दूध, दही, घी, शक्कर, फलों और तिल के तेल से बने पंचामृत से भगवान का विधिवत अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम के उच्चारण के साथ जल अर्पित किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

श्रृंगार और भस्म अर्पण की दिव्य परंपरा

कपूर आरती के पश्चात जटाधारी भगवान महाकाल को मस्तक पर रजत चंद्र अर्पित किया गया। भांग, चंदन और गुलाब के फूलों की माला से उनका श्रृंगार किया गया। इसके बाद रजत मुकुट और त्रिपुंड अर्पित कर ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर भस्म रमाई गई। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में भांग, ड्रायफ्रूट, आभूषणों और पुष्पों से सजाया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूलों की मालाएं अर्पित की गईं।

तिल के लड्डुओं और पकवानों का महाभोग

मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान महाकाल को विशेष रूप से तिल और शक्कर से बने लड्डुओं, तिल्ली के पकवानों और फलों का महाभोग लगाया गया। ठंड के मौसम में तिल को विशेष महत्व दिया जाता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल का दान और भोग पुण्यदायी माना जाता है। दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।

शिप्रा नदी में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

इधर, मकर संक्रांति के अवसर पर उज्जैन में शिप्रा नदी के घाटों पर भी आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट सहित अन्य स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने पवित्र शिप्रा स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

प्रशासनिक व्यवस्थाएं रहीं चाक-चौबंद

रामघाट के पुजारी पंडित आनंद जोशी ने बताया कि मकर संक्रांति पर शिप्रा स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है, इसी कारण दूर-दराज से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और नगर निगम द्वारा घाटों पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और होमगार्ड के जवान घाटों पर तैनात रहे, जिससे स्नान शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हुआ। पूरे घाट क्षेत्र में जयकारों और भक्ति गीतों के बीच उत्सव का माहौल बना रहा।

स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!

विश्व बैंक ने 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.2 फीसदी किया

मकर संक्रांति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की गौसेवा: आवास पर गायों को चारा खिलाकर दिया प्रकृति और संस्कृति का संदेश

न्यूजीलैंड ने रचा इतिहास: दूसरे वनडे में भारत को 7 विकेट से हराया

नोटा नहीं, उपलब्ध उम्मीदवारों में सर्वश्रेष्ठ का चयन करें: डॉ. भागवत