गंदे पानी और गोमांस के मुद्दे पर निगम मुख्यालय का घेराव, महापौर के खिलाफ तीखे नारे

भोपाल। शहर में गंदे पानी की आपूर्ति और कथित गोमांस प्रकरण को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को सड़कों पर खुलकर सामने आ गया। जिला कांग्रेस के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आईएसबीटी स्थित नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और वहां जमकर प्रदर्शन किया। आंदोलन का नेतृत्व रविंद्र साहू झूमरवाला ने किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन पर लापरवाही, जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ और जिम्मेदारों को बचाने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने महापौर Malti Rai और नगर निगम की महापौर परिषद को निशाने पर रखा। कांग्रेस कार्यकर्ता अपने साथ महापौर का 11 सिर वाला प्रतीकात्मक कटआउट लेकर पहुंचे थे। उनका कहना था कि इन सिरों के जरिए उन सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को दर्शाया गया है, जो इस पूरे मामले में जवाबदेह हैं, लेकिन कार्रवाई से बच रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर कटआउट और पुतला दहन ने माहौल को और अधिक गरमा दिया।

पुलिस से धक्का-मुक्की, नारेबाजी से गूंजा परिसर

जब प्रदर्शनकारी निगम कार्यालय की ओर बढ़े तो वहां तैनात पुलिस बल ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड के सामने बैठकर नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ रोष जताया। उनका आरोप था कि कई शिकायतों के बावजूद न तो पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की गई।

इंदौर की घटना का हवाला, भोपाल में खतरे की चेतावनी

कांग्रेस नेताओं ने अपने संबोधन में Indore में दूषित पानी से हुई मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि भोपाल में भी हालात चिंताजनक हैं। उनका कहना था कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो यहां भी बड़ी त्रासदी हो सकती है। कई इलाकों में सीवेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन पास-पास होने से गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है। लोग मजबूरी में वही पानी उपयोग कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

जल सुनवाई पर उठे सवाल

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वार्ड कार्यालयों में होने वाली जल सुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। शिकायतें दर्ज तो होती हैं, लेकिन समाधान नजर नहीं आता। कई स्थानों पर नाले के पानी को भी पीने योग्य बताने के आरोप लगाए गए, जिसे लेकर लोगों में आक्रोश है। कांग्रेस का कहना है कि जब नागरिकों का स्वास्थ्य दांव पर हो, तब इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

स्लॉटर हाउस मामले में बड़े जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

गोमांस मिलने के मुद्दे को भी कांग्रेस ने गंभीर बताया। नेताओं का कहना था कि अब तक कार्रवाई छोटे कर्मचारियों तक सीमित रही, जबकि निर्णय लेने वाले पदाधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा। उनका दावा है कि संबंधित प्रस्ताव महापौर परिषद की बैठक से पारित हुआ था, इसलिए जवाबदेही तय होना जरूरी है। जब तक उच्च स्तर पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक पारदर्शिता पर सवाल उठते रहेंगे।

प्रशासन पर दबाव बढ़ाने की चेतावनी

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी है। शहरवासी साफ पानी और जवाबदेह प्रशासन चाहते हैं।

सोमवार का यह प्रदर्शन नगर निगम के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि जनता की चिंताओं को अब नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

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