दो दिवसीय राजकीय यात्रा में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा, रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर होगी व्यापक चर्चा
नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच राजनयिक सहयोग के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर 4 दिसंबर से दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि पुतिन इस यात्रा के दौरान दिल्ली में आयोजित होने वाली 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता में भाग लेंगे, जहां दोनों नेता रणनीतिक सहयोग को नए चरण में ले जाने पर विचार-विमर्श करेंगे।
वार्षिक शिखर वार्ता: 20 वर्षों से जारी परंपरा
भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर वार्ता एक स्थायी और मजबूत परंपरा है, जिसके तहत दोनों देश क्रम से एक-दूसरे की मेजबानी करते हैं। यह तंत्र दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति का आकलन करने और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर प्रदान करता है।
राष्ट्रपति पुतिन आखिरी बार 2021 में भारत आए थे। तीन साल बाद होने वाली इस यात्रा को दोनों देशों के कूटनीतिक और सामरिक समीकरणों में विशेष महत्व दिया जा रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मु आयोजित करेंगी भोज
भारत आगमन पर राष्ट्रपति पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राजकीय भोज आयोजित किया जाएगा। इस दौरान उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता भी होगी, जिसमें दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयामों पर चर्चा होगी।
द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और भविष्य की रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली वार्ता में विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श की संभावना है—
रक्षा सहयोग व रक्षा उपकरणों की संयुक्त निर्माण परियोजनाएं
ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा सहयोग
व्यापार बढ़ाने तथा भुगतान प्रणाली को सुगम बनाने के उपाय
विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार
अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े समझौते
विशेषज्ञों के अनुसार इस यात्रा के दौरान कुछ बड़े रक्षा समझौते भी घोषित किए जा सकते हैं, जो भारत की दीर्घकालीन सामरिक जरूरतों को पूरा करेंगे।
यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक हालात पर भी होगी चर्चा
चूंकि वैश्विक परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है, इसलिए भारत-रूस शिखर वार्ता में यूक्रेन संघर्ष, पश्चिमी देशों के साथ रूस के संबंध, एशिया की सुरक्षा संरचना, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग जैसे विषयों पर विचार साझा किया जाएगा।
भारत यूक्रेन युद्ध पर अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक स्थिति रखता है और बातचीत एवं कूटनीति के माध्यम से समाधान का समर्थन करता आया है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की उम्मीद है।
विशेष एवं अधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा
भारत और रूस के बीच संबंधों को 'विशेष एवं अधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा प्राप्त है। यह संबंध रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान-तकनीक, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग के विस्तृत दायरे को समेटता है। पुतिन की यात्रा इस साझेदारी में नई ऊर्जा का संचार करेगी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों को पारस्परिक हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श कर भविष्य के लिए नई रणनीति तैयार करने का अवसर प्रदान करेगी।
भारत के कूटनीतिक कैलेंडर के लिए अहम पड़ाव
दिसंबर में होने वाली यह यात्रा भारत के कूटनीतिक कैलेंडर का प्रमुख आयोजन है, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है जब विश्व राजनीति में गहरी अस्थिरता है। भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की नीति और रूस के साथ दशकों पुराने भरोसेमंद संबंध इस मुलाकात को विशेष महत्व प्रदान करते हैं।
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