नई वीजा नीति: अमेरिका ने बॉन्ड पायलट प्रोग्राम का दायरा बढ़ाया, नेपाल समेत 25 नए देश शामिल
काठमांडू, 07 जनवरी (हि.स.)। अमेरिका ने अपनी वीजा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए नेपाल को भी वीजा बॉन्ड पायलट प्रोग्राम के तहत शामिल कर लिया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद नेपाल समेत कुल 38 देशों के नागरिकों को अमेरिका का वीजा प्राप्त करने से पहले अधिकतम 15 हजार अमेरिकी डॉलर तक का आर्थिक बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है। यह निर्णय अमेरिका में वीजा अवधि से अधिक समय तक ठहरने की बढ़ती घटनाओं को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
अमेरिकी सरकार ने हाल ही में उन देशों की सूची का विस्तार किया है, जिनके नागरिकों से व्यापार, पर्यटन या अत्यावश्यक यात्रा से जुड़े अल्पकालिक वीजा के लिए आवेदन करते समय बॉन्ड की मांग की जा सकती है। इस सूची में नेपाल को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही अब इस पायलट कार्यक्रम में कुल 38 देश आ चुके हैं, जिन पर यह नई शर्त लागू होगी।
अगस्त 2025 में शुरू हुआ था पायलट प्रोग्राम
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, यह वीजा बॉन्ड पायलट प्रोग्राम अगस्त 2025 में शुरू किया गया था। नेपाल जैसे देशों के नागरिकों के लिए यह व्यवस्था 21 जनवरी से प्रभावी होगी। इस कार्यक्रम के तहत वीजा इंटरव्यू के दौरान कांसुलर अधिकारी यह तय करेगा कि आवेदक को बॉन्ड जमा करना है या नहीं और यदि करना है तो उसकी राशि 5 हजार, 10 हजार या अधिकतम 15 हजार अमेरिकी डॉलर कितनी होगी।
अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय आवेदक की यात्रा प्रोफाइल, पिछली यात्राओं के रिकॉर्ड और संभावित जोखिम के आकलन के आधार पर लिया जाएगा। सभी आवेदकों से अनिवार्य रूप से बॉन्ड नहीं मांगा जाएगा, बल्कि केवल उन्हीं मामलों में यह शर्त लागू होगी, जहां अधिकारी को वीजा शर्तों के उल्लंघन की आशंका होगी।
बॉन्ड जमा करने की प्रक्रिया और शर्तें
इस नई नीति के तहत बॉन्ड जमा करने वाले आवेदकों को डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का निर्धारित फॉर्म भरना होगा। बॉन्ड की राशि का भुगतान केवल अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की आधिकारिक ऑनलाइन भुगतान प्रणाली के माध्यम से ही किया जा सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तीसरे पक्ष की वेबसाइट या एजेंट के जरिए किए गए भुगतान के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगी।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल होगी, ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी या अवैध वसूली की संभावना न रहे।
निर्धारित हवाई अड्डों से ही प्रवेश और निकास अनिवार्य
बॉन्ड पायलट प्रोग्राम के तहत वीजा प्राप्त करने वाले यात्रियों के लिए अमेरिका में प्रवेश और निकास को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। ऐसे यात्रियों को केवल कुछ निर्धारित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के जरिए ही अमेरिका में प्रवेश और प्रस्थान की अनुमति होगी। इनमें बोस्टन का लोगन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, न्यूयॉर्क का जॉन एफ. केनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और वाशिंगटन का दुलेस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल हैं।
नियमों का उल्लंघन करने की स्थिति में यात्री का अमेरिका में प्रवेश रोका जा सकता है या फिर उसके निकास का रिकॉर्ड सही ढंग से दर्ज नहीं किया जाएगा, जिससे भविष्य में वीजा प्राप्त करने में गंभीर दिक्कतें आ सकती हैं।
समय पर देश छोड़ने पर मिलेगा पूरा रिफंड
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई यात्री स्वीकृत वीजा अवधि के भीतर अमेरिका छोड़ देता है, या वीजा की समाप्ति से पहले यात्रा ही नहीं करता, या फिर प्रवेश बिंदु पर उसे अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती, तो जमा किया गया बॉन्ड स्वतः रद्द कर दिया जाएगा और पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
इस प्रावधान का उद्देश्य यात्रियों को समय पर देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना और वीजा नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है।
नेपाल समेत कई देशों पर लागू होगी नीति
इस नीति के तहत नेपाल के अलावा बांग्लादेश, भूटान, नाइजीरिया, वेनेजुएला, तंज़ानिया, ज़ाम्बिया, जिम्बाब्वे सहित कई अन्य देशों के नागरिक भी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों में वीजा अवधि से अधिक समय तक ठहरने के मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है, इसलिए इन्हें पायलट प्रोग्राम के दायरे में लाया गया है।
नेपाल में बढ़ी चिंता, यात्रियों पर पड़ेगा आर्थिक बोझ
नेपाल में इस फैसले को लेकर चिंता का माहौल है। पर्यटन और शिक्षा से जुड़े क्षेत्रों का कहना है कि इतनी बड़ी बॉन्ड राशि कई मध्यमवर्गीय यात्रियों के लिए अमेरिका की यात्रा को मुश्किल बना सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति अवैध रूप से अमेरिका में रुकने की प्रवृत्ति को रोकने में प्रभावी साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, अमेरिका की यह नई वीजा बॉन्ड नीति नेपाल समेत कई विकासशील देशों के नागरिकों के लिए यात्रा प्रक्रिया को अधिक सख्त और महंगा बनाने वाली है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस फैसले का अमेरिका-नेपाल यात्रा और आपसी संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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