April 19, 2025 9:02 PM

वित्त वर्ष 2025 में भारत का रक्षा निर्यात 12% से अधिक बढ़ा, 23,622 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

  • भारतीय उत्पादों की बढ़ती पहुंच और ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने की भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमता को दर्शाता है

नई दिल्ली । डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेंकिंग्स (डीपीएसयू) ने वित्त वर्ष 2025 में अपने निर्यात में 42.85 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की है, जो वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती पहुंच और ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने की भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमता को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025 में रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र और डीपीएसयू ने क्रमशः 15,233 करोड़ रुपये और 8,389 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, जबकि वित्त वर्ष 2024 के लिए यह आंकड़ा क्रमशः 15,209 करोड़ रुपये और 5,874 करोड़ रुपये था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2029 तक रक्षा निर्यात को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर सैन्य बल से विकसित होकर भारत अब आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादन पर अधिक ध्यान केंद्रित करने वाला बन गया है। रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष में गोला-बारूद, हथियार, सब सिस्टम/सिस्टम, पार्ट्स और घटकों से लेकर कई तरह की वस्तुओं का निर्यात लगभग 80 देशों को किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, रक्षा उत्पादन विभाग के पास निर्यात से जुड़े ऑथोराइजेशन रिक्वेस्ट की एप्लीकेशन और प्रोसेसिंग के लिए एक डेडिकेटेड पोर्टल है। वित्त वर्ष 2024-25 में 1,762 निर्यात से जुड़े ऑथोराइजेशन जारी किए गए, जबकि इससे पिछले वर्ष 1,507 निर्यात से जुड़े ऑथोराइजेशन जारी किए गए थे, जो 16.92 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करता है।
इसी अवधि में निर्यातकों की कुल संख्या में भी 17.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन में 3 लाख करोड़ रुपये हासिल करना है, जिससे देश की ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थिति मजबूत होगी।
लगभग 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण अब घरेलू स्तर पर निर्मित होते हैं, जो पहले के 65-70 प्रतिशत आयात निर्भरता से एक बड़ा बदलाव है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार में 16 डीपीएसयू, 430 से अधिक लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और लगभग 16,000 एमएसएमई शामिल हैं, जो स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करते हैं।

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