डिजिलॉकर सरकार की आधिकारिक डिजिटल सेवा है, जहां आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे जरूरी दस्तावेज़ सुरक्षित रखे जाते हैं। लेकिन साइबर अपराधी इसी नाम से मिलते-जुलते नकली एप बनाकर लोगों को ठग रहे हैं।
ये फर्जी एप देखने में बिल्कुल असली जैसे लगते हैं और लोग धोखे में आकर अपनी निजी जानकारी डाल देते हैं।
सरकारी चेतावनी क्यों जारी की गई?
सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि नकली डिजिलॉकर एप के ज़रिए
बैंक जानकारी
मोबाइल ओटीपी
निजी दस्तावेज़
चोरी किए जा सकते हैं।
फर्जी डिजिलॉकर एप से क्या नुकसान हो सकता है?
- पहचान की चोरी
- बैंक खाते से पैसा निकलना
- फर्जी लोन लिया जाना
- दस्तावेज़ों का गलत इस्तेमाल
- मानसिक तनाव और डर
यह सीधे आपके मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल जीवनशैली को नुकसान पहुंचाता है।
फर्जी डिजिलॉकर एप की पहचान कैसे करें?
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एप का नाम ध्यान से देखें
गलत वर्तनी या अतिरिक्त शब्द अक्सर फर्जी होने का संकेत होते हैं।
डाउनलोड का स्रोत
सिर्फ सरकारी या प्रमाणित माध्यम से ही एप लें।
अनुमति पर ध्यान दें
अगर एप कैमरा, कॉल या मैसेज की अनावश्यक अनुमति मांगे तो सावधान हो जाएं।
लोगो और डिज़ाइन
अस्पष्ट लोगो और खराब डिज़ाइन खतरे का संकेत हैं।
असली डिजिलॉकर एप कैसे पहचानें?
सरकारी चिह्न मौजूद हो
सीमित और जरूरी अनुमति
सही हिंदी भाषा
नियमित अपडेट
साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- किसी को ओटीपी न बताएं
- समय-समय पर पासवर्ड बदलें
- सार्वजनिक वाई-फाई से बचें
- मोबाइल में सुरक्षा लॉक रखें
- जागरूक डिजिटल आदतें बनाएं
अगर गलती से फर्जी एप डाउनलोड हो जाए तो क्या करें?
सभी पासवर्ड बदलें
बैंक और संबंधित विभाग को सूचना दें
साइबर शिकायत दर्ज करें
निष्कर्ष:
डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। सही जानकारी और जागरूकता से साइबर अपराध रोके जा सकते हैं।
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