भारतीय घरों में सौंफ को केवल एक मसाले के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह रोजमर्रा की सेहत से गहराई से जुड़ी एक अहम चीज मानी जाती है। खाना खाने के बाद सौंफ खाना पाचन को बेहतर बनाने, पेट की भारीपन की समस्या दूर करने और मुंह की दुर्गंध को खत्म करने की एक पुरानी और प्रचलित परंपरा है। कई घरों में तो सौंफ को मिश्री के साथ रखा जाता है, ताकि भोजन के बाद इसे आसानी से खाया जा सके। इसके अलावा सौंफ का उपयोग चाय, मिठाई, घरेलू नुस्खों और आयुर्वेदिक काढ़ों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। यही कारण है कि आम लोग सौंफ को पूरी तरह सुरक्षित, प्राकृतिक और लाभकारी मान लेते हैं।

लेकिन बीते कुछ वर्षों में खाद्य पदार्थों में तेजी से बढ़ती मिलावट ने इस भरोसे को गंभीर रूप से झकझोर दिया है। अब मिलावट केवल दूध, तेल या मसालों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सौंफ जैसी साधारण और रोज इस्तेमाल होने वाली चीज भी इसकी चपेट में आ चुकी है। समय-समय पर सौंफ में रंग, रसायन और घटिया पदार्थ मिलाए जाने की खबरें सामने आती रही हैं, जिसने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।

बाजार में जब लोग चमकदार, गहरे हरे रंग की सौंफ देखते हैं, तो अक्सर यह सोच लेते हैं कि यही सौंफ सबसे अच्छी और ताजी होगी। लेकिन सच्चाई कई बार इसके ठीक उलट होती है। जरूरत से ज्यादा चमकदार और एकसार रंग वाली सौंफ में कृत्रिम रंग मिलाए जाने की संभावना अधिक होती है। ऐसी सौंफ देखने में भले ही आकर्षक लगे, लेकिन लंबे समय तक इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

मिलावटी सौंफ से शरीर को कैसे नुकसान पहुंच सकता है

मिलावटी सौंफ का असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखाई देता है। शुरुआत में लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक इसका सेवन कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। सबसे पहले इसका असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। पेट दर्द, गैस, अपच, जलन और भारीपन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं, जिससे रोजमर्रा का जीवन प्रभावित होने लगता है।

इसके अलावा सौंफ में मिलाए गए कृत्रिम रंग और रसायन शरीर के अंदर जाकर लिवर और किडनी पर दबाव डालते हैं। लगातार सेवन करने से ये अंग धीरे-धीरे कमजोर हो सकते हैं। कुछ लोगों में मिलावटी सौंफ खाने से एलर्जी, त्वचा पर खुजली, उलटी, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह नुकसान तुरंत सामने नहीं आता, बल्कि समय के साथ शरीर के अंदर जमा होता रहता है।


सौंफ में मिलावट क्यों की जाती है

सौंफ में मिलावट का मुख्य कारण मुनाफा होता है। मिलावटखोर व्यापारी सस्ती और घटिया सौंफ को महंगी और अच्छी दिखाने के लिए उसमें रंग और रसायन मिला देते हैं। हरे रंग की चमकदार सौंफ ज्यादा बिकती है, इसलिए कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल आम हो गया है।

कई बार पुरानी और खराब सौंफ को रंग लगाकर नई सौंफ की तरह बाजार में उतार दिया जाता है। कुछ मामलों में वजन बढ़ाने के लिए उसमें छोटे पत्थर, धूल या दूसरे सस्ते बीज भी मिला दिए जाते हैं। इन सबका सीधा असर उपभोक्ता की सेहत पर पड़ता है, लेकिन मिलावटखोरों को इसकी कोई परवाह नहीं होती।


आपकी सौंफ में मिलावट है या नहीं, ऐसे करें पहचान

सौंफ खरीदने के बाद घर पर ही कुछ आसान तरीकों से उसकी जांच की जा सकती है, इसके लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती।

पानी से जांच
थोड़ी सी सौंफ एक कटोरी पानी में डालें। अगर पानी का रंग बदलने लगे या हरा रंग घुलने लगे, तो यह रंग की मिलावट का संकेत है।

हथेली पर रगड़कर देखें
सौंफ को हथेली पर रगड़ें। अगर हाथ पर रंग चढ़ जाए, तो समझ लें कि उसमें मिलावट हो सकती है।

खुशबू से पहचान
शुद्ध सौंफ की खुशबू हल्की और प्राकृतिक होती है। बहुत तेज या अजीब गंध मिलावट की ओर इशारा करती है।

स्वाद से पहचान
असली सौंफ का स्वाद हल्का मीठा होता है। कड़वाहट या तेज स्वाद मिलावट का संकेत हो सकता है।

जलाने पर परीक्षण
थोड़ी सौंफ जलाकर देखें। अगर जलने पर असामान्य गंध आए या रंग बदले, तो उसमें रसायन मिलाए जा सकते हैं।


बाजार में मिलने वाली सौंफ को देखकर कैसे न करें गलती

अक्सर लोग यह सोच लेते हैं कि जितनी हरी और चमकदार सौंफ होगी, उतनी ही अच्छी होगी। जबकि सच्चाई इसके उलट भी हो सकती है। बहुत ज्यादा हरी और चमकदार सौंफ अक्सर कृत्रिम रंग से तैयार की जाती है।

प्राकृतिक सौंफ का रंग हल्का हरा या पीला सा हो सकता है और उसमें ज्यादा चमक नहीं होती। इसलिए केवल दिखावे के आधार पर सौंफ खरीदना सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।


सौंफ खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

सौंफ खरीदते समय थोड़ी सी समझदारी आपको बड़े स्वास्थ्य जोखिम से बचा सकती है। जहां तक संभव हो, बहुत ज्यादा चमकदार और एकसार रंग वाली सौंफ से बचें। हमेशा भरोसेमंद दुकान या परिचित दुकानदार से ही सौंफ खरीदना बेहतर रहता है।

खुली सौंफ लेते समय उसकी खुशबू, रंग और दानों की बनावट पर ध्यान दें। घर लाने के बाद सौंफ को साफ, सूखे और हवा बंद डिब्बे में रखें, ताकि नमी और कीड़ों से बचाव हो सके।

900 किलो मिलावटी सौंफ बरामद होना क्यों है गंभीर चेतावनी

हाल ही में खाद्य विभाग की कार्रवाई में 900 किलो मिलावटी सौंफ बरामद की गई है, जिसने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सौंफ को आमतौर पर पाचन के लिए फायदेमंद और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला सुरक्षित मसाला माना जाता है। खाना खाने के बाद सौंफ खाना एक आम आदत है, जो मुंह की दुर्गंध दूर करने से लेकर पाचन सुधारने तक में मदद करती है। लेकिन जब यही सौंफ मिलावटी हो जाए, तो फायदे की जगह यह शरीर के लिए नुकसानदेह बन सकती है।

मिलावटखोर मुनाफा कमाने के लिए सौंफ में रंग, रसायन और घटिया पदार्थ मिला देते हैं, जिससे इसका रंग और आकार तो आकर्षक दिखता है, लेकिन इसके अंदर छुपा जहर धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। यही वजह है कि 900 किलो मिलावटी सौंफ पकड़े जाने की खबर केवल एक घटना नहीं, बल्कि हर उपभोक्ता के लिए चेतावनी है।


निष्कर्ष

आपकी सौंफ शुद्ध है या नहीं, यह जानना अब केवल विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। मिलावटी सौंफ धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। सही पहचान, सावधानी और जागरूकता अपनाकर आप शुद्ध सौंफ का सेवन कर सकते हैं और अपने परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।