हीरो से 1 रुपया ज्यादा फीस, बिना मैनेजर के काम – OG विलेन अमरीश पुरी का अलग ही स्वैग
अपनी दमदार एक्टिंग से बॉलीवुड में 45 साल तक राज करने वाले अमरीश पुरी को कौन भूल सकता है। उनकी भारी आवाज़, खौफनाक अंदाज़ और जबरदस्त स्क्रीन प्रेज़ेंस ने उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे मशहूर विलेन बना दिया। उनका निधन 12 जनवरी 2005 को हुआ था, लेकिन आज भी उनके किरदार लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं।
/swadeshjyoti/media/post_attachments/hindi/sites/default/files/2024/09/13/3228647-amrish-puri-4-173503.jpg)
अमरीश पुरी सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि अपनी पर्सनल लाइफ में भी काफी अलग थे। उनके बारे में एक रोचक किस्सा अभिनेता सौरभ शुक्ला ने साझा किया था, जिससे पता चलता है कि उनका स्वैग बाकी सितारों से बिल्कुल अलग था।
हीरो से 1 रुपया ज्यादा फीस लेते थे
अमरीश पुरी ने अपने करियर की शुरुआत लीड एक्टर के रूप में की थी। “निशांत” और “मंथन” जैसी फिल्मों में उन्होंने मुख्य किरदार निभाया थी। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि नेगेटिव रोल में उनकी पकड़ ज्यादा मजबूत है। इसके बाद उन्होंने विलेन के किरदार निभाने शुरू किए और दर्शकों पर छा गए।
/swadeshjyoti/media/post_attachments/assets/images/2020/06/22/a_1592781664-318758.png?w=750)
सौरभ शुक्ला ने बताया कि अमरीश पुरी हमेशा फिल्म के हीरो से 1 रुपया ज्यादा फीस लेते थे। यह उनके आत्मविश्वास और स्टारडम को दिखाता है। उनका किरदार फिल्म में हीरो से कम अहम नहीं होता उनकी ऐसी मान्यता थी।
बिना मैनेजर के करते थे काम
बड़े-बड़े सितारों के पास आज के समय में पूरी टीम होती है – मैनेजर, पीआर टीम, सेक्रेटरी, ड्राइवर और न जाने क्या-क्या। लेकिन अमरीश पुरी बिल्कुल अलग थे। उनका कोई मैनेजर नहीं होता था। उनके साथ सिर्फ एक मेकअप मैन रहता था। जब सौरभ शुक्ला ने उनसे पूछा कि आपके पास स्टाफ क्यों नहीं है, तो अमरीश पुरी ने हंसते हुए कहा
“मैं पैसे कमाता हूं, उसे स्टाफ पर फिजूल खर्च क्यों करूं?”
/swadeshjyoti/media/post_attachments/assets/images/2019/06/22/a_1561184639-180889.jpeg?w=414&dpr=1.0&q=80)
खुद गाड़ी चलाकर सेट पर आते थे
अमरीश पुरी अपनी कार खुद चलाकर शूटिंग सेट पर आते थे। उन्हें दिखावा बिल्कुल पसंद नहीं था। ना ही वो अपनी स्टारडम का शोर मचाते थे। सादगी ही उनकी पहचान थी।
भले ही वह फिल्मों में खतरनाक विलेन बने रहते थे, लेकिन असल जिंदगी में वह बहुत सिंपल इंसान थे। अमरीश पुरी का ओरा सबसे अलग था। उनकी मौजूदगी से ही माहौल बदल जाता था। वह कम बोलते थे, लेकिन जब बोलते थे तो असरदार होता था। उनका मानना था कि असली स्टार वही होता है, जिसे ज्यादा दिखावा करने की जरूरत ना पड़े।
/swadeshjyoti/media/post_attachments/hindi/sites/default/files/styles/zm_700x400/public/2021/06/22/853434-amrish-puri-249657.jpg?itok=mIftNgcE)
शानदार फिल्मी करियर
अमरीश पुरी ने 1970 में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने करीब 450 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
उनकी कुछ यादगार फिल्में हैं –
- मिस्टर इंडिया
- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
- जानी दुश्मन
- तहलका
- गर्व
- कोयला
- करण अर्जुन
उनकी आखिरी फिल्म कच्ची सड़क थी, जो 2006 में रिलीज हुई।
उनकी याद आज भी ज़िंदा है
भले ही अमरीश पुरी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके किरदार, डायलॉग्स और अंदाज़ आज भी लोगों को याद हैं। उन्होंने विलेन की परिभाषा ही बदल दी। उनका सादा जीवन, मजबूत सोच और अलग स्वैग उन्हें बाकी सितारों से अलग बनाता है।
सुबह की ये 5 आदतें बच्चों को जीवन में बना सकती हैं सफल, आज से शुरुआत करें
हाईकोर्ट का सख्त आदेश: चाइनीज मांझा इस्तेमाल करने पर गैर-इरादतन हत्या का केस
सर्दियों में सुरक्षित यात्रा कैसे करें, पैकिंग में ध्यान रखें ये 11 बातें, न करें ये गलतियां
तकनीकी खराबी के चलते आखिरी समय में रोकी गई अकासा की उड़ान: पुणे से बंगलूरू जा रही थी फ्लाइट
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/01/13/w-1-2026-01-13-16-22-36.jpg)