पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी से बाजार में दबाव, अमेरिकी और एशियाई बाजारों की कमजोरी का भी असर

मुंबई : पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के कारण शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। एक दिन की राहत के बाद बाजार में फिर से दबाव देखने को मिला और शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

शुक्रवार सुबह कारोबार शुरू होते ही बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 572.43 अंक गिरकर 79,443.47 के स्तर पर आ गया। इसी तरह राष्ट्रीय शेयर बाजार का 50 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी गिरावट के साथ खुला और 178.75 अंक फिसलकर 24,587.15 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के कारण निफ्टी एक बार फिर 24,600 अंकों के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया।

पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर

विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशकों के बीच यह आशंका बनी हुई है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकालने से भी भारतीय बाजार पर दबाव बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में विदेशी निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों में पूंजी का प्रवाह कम हो रहा है।

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत

भारतीय शेयर बाजार पर अमेरिकी और एशियाई बाजारों के रुख का भी असर पड़ा है। अमेरिकी बाजारों में गुरुवार को कमजोरी देखी गई, जिससे एशियाई बाजारों में भी सुस्ती का माहौल बना रहा। एशिया के कई प्रमुख बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है तो उसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं और सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव बढ़ जाता है।

रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत

शेयर बाजार में गिरावट के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने हल्की मजबूती दिखाई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया स्थिर रुख के साथ 2 पैसे मजबूत होकर 91.62 के स्तर पर पहुंच गया। यह बढ़त ऐसे समय में दर्ज की गई जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कुछ राहत भरी खबर सामने आई।

बताया गया है कि अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट देने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव में कुछ कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन इस निर्णय से कुछ हद तक राहत मिली है।

निवेशकों में सतर्कता का माहौल

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम, वैश्विक आर्थिक संकेतक और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में फिर से स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशक बाजार के आगामी रुख को लेकर सतर्क बने हुए हैं और प्रमुख वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।

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