लद्दाख और सिक्किम में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने का बड़ा फैसला, पर्यावरण और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन
नई दिल्ली। चीन सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों में भारत ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। पर्यावरण मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय समिति ने लद्दाख और सिक्किम जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 17 महत्वपूर्ण रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इन इलाकों में भारत और चीन के बीच लंबे समय से सैन्य और रणनीतिक तनाव बना हुआ है। यह मंजूरी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की स्थायी समिति की बैठक में दी गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता, पर्यावरण के साथ संतुलन
पर्यावरण मंत्रालय के इस फैसले को भारत की सुरक्षा नीति का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि इन सभी परियोजनाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंजूरी दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रोजेक्ट्स में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के सभी जरूरी उपायों को शामिल किया गया है और यह पूरी प्रक्रिया मौजूदा कानूनों के तहत ही की गई है।
NBWL की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों और उनके आसपास होने वाला विकास कार्य संतुलित, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हो। ऐसे में चीन सीमा के पास रक्षा परियोजनाओं को हरी झंडी देना यह दिखाता है कि सरकार ने सुरक्षा जरूरतों और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
किन-किन रक्षा परियोजनाओं को मिली मंजूरी
जिन 17 डिफेंस प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, उनमें सीमा क्षेत्रों में नई सैन्य चौकियों का निर्माण, एक ब्रिगेड मुख्यालय की स्थापना, गोला-बारूद भंडारण सुविधाएं और सैनिकों के लिए प्रशिक्षण ढांचे का विकास शामिल है। इसके अलावा लद्दाख और सिक्किम जैसे दुर्गम इलाकों में पुल और पुलिया बनाने के प्रस्ताव भी स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य चीन से सटी सीमाओं पर सेना की तैनाती, लॉजिस्टिक्स और त्वरित मूवमेंट को मजबूत करना है।
रणनीतिक जानकारों का मानना है कि ऊंचाई वाले इलाकों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही सीमाओं की वास्तविक सुरक्षा की रीढ़ होता है। सड़कों, पुलों और ठिकानों की कमी के कारण पहले कई बार भारतीय सेना को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में इन परियोजनाओं से भारत की बॉर्डर मैनेजमेंट क्षमता में बड़ा सुधार होगा।
70 अन्य प्रस्तावों पर भी हुई अहम चर्चा
NBWL की इसी बैठक में केवल रक्षा परियोजनाओं पर ही नहीं, बल्कि संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, बाघ अभयारण्यों और इको-सेंसिटिव जोन के आसपास सार्वजनिक उपयोगिता और ढांचागत विकास से जुड़े करीब 70 प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। मंत्रालय के अनुसार, इन प्रस्तावों पर पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वैधानिक आवश्यकताओं और स्थानीय समुदायों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत चर्चा हुई।
आम जनता से जुड़े प्रोजेक्ट भी एजेंडे में
सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़े जिन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया गया, उनमें जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, सड़कों का चौड़ीकरण, 4G मोबाइल टावर और ट्रांसमिशन लाइनों की स्थापना शामिल है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में एक मध्यम सिंचाई परियोजना पर भी चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य पीने के पानी और कृषि सिंचाई की सुविधा को बेहतर बनाना है।
चीन सीमा पर क्यों अहम है यह फैसला
लद्दाख और सिक्किम जैसे क्षेत्र न केवल भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण हैं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील हैं। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ वर्षों में तनाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में इन इलाकों में मजबूत और आधुनिक रक्षा ढांचा भारत की सैन्य तैयारी और कूटनीतिक संदेश दोनों के लिए जरूरी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि भारत अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीति के तहत काम कर रहा है।
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