अमेरिकी टैरिफ के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी नीचे लुढ़के
नई दिल्ली/मुंबई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने के ऐलान का भारतीय शेयर बाजार पर सीधा असर पड़ा है। गुरुवार को बाजार खुलते ही भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 335.71 अंक टूटकर 80,208.28 पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 114.15 अंक गिरकर 24,460.05 के स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों में भारी बेचैनी दिखी और विदेशी निवेशकों ने भी भारी बिकवाली की।

अमेरिकी फैसले का पृष्ठभूमि
अमेरिका ने यह टैरिफ फैसला भारत द्वारा रूसी तेल का आयात जारी रखने को लेकर लिया है। ट्रंप प्रशासन ने इस कदम को अमेरिका के ऊर्जा सुरक्षा के खिलाफ बताया है और भारत पर व्यापारिक दबाव बनाने की रणनीति के तहत यह निर्णय लिया। इस फैसले के चलते भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात अब महंगा हो जाएगा, जिससे कई क्षेत्रों में मंदी की आशंका जताई जा रही है।
किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ का सर्वाधिक प्रभाव उन क्षेत्रों पर पड़ने की संभावना है जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं, जैसे:
- कपड़ा उद्योग: अमेरिका भारत का प्रमुख ग्राहक है। कपड़ा निर्यात पर टैरिफ बढ़ने से प्रतिस्पर्धात्मकता घटेगी और ऑर्डर घट सकते हैं।
- समुद्री उत्पाद: भारत समुद्री उत्पादों का बड़ा हिस्सा अमेरिका को निर्यात करता है। टैरिफ से व्यापार प्रभावित होगा।
- चमड़ा और फुटवियर उद्योग: इस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिए यह फैसला घाटे का सौदा बन सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने अमेरिका के इस कदम को “अनुचित, गलत और अविवेकपूर्ण” करार दिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने इस फैसले के खिलाफ WTO में शिकायत दर्ज कराने की संभावना जताई है। भारत ने कहा है कि वह अमेरिकी टैरिफ नीति का पूरी मजबूती से विरोध करेगा और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
बाजार में आई गिरावट
गुरुवार को बाजार खुलते ही निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर खुले और पूरे सत्र में दबाव में रहे।
प्रमुख गिरावट वाले शेयर:
- अदाणी पोर्ट्स
- टाटा मोटर्स
- कोटक महिंद्रा बैंक
- एनटीपीसी
- टाटा स्टील
कुछ लाभ में रहने वाले शेयर:
- ट्रेंट
- टाइटन
- सन फार्मा
- आईटीसी
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 4,999.10 करोड़ रुपये के शेयर बाजार से निकाले। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यह बिकवाली बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है।
एशियाई बाजारों की स्थिति
जहां भारतीय बाजार दबाव में रहे, वहीं अधिकांश एशियाई बाजारों में तेजी देखने को मिली:
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी
- जापान का निक्केई 225
- शंघाई का एसएसई कम्पोजिट
- हांगकांग का हैंग सेंग
यह सभी हरे निशान पर बंद हुए।
तेल कीमतों में इज़ाफा
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1 प्रतिशत बढ़कर 67.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। इससे भारत जैसे आयातक देशों पर मुद्रास्फीति का दबाव और बढ़ सकता है। तेल कीमतों में उछाल का असर आने वाले हफ्तों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा दरों पर भी देखा जा सकता है।
विश्लेषकों की राय
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट केवल एक शुरुआत हो सकती है यदि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव और गहराता है। निवेशकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
HSBC इंडिया के मुख्य निवेश सलाहकार मनोज धवन के अनुसार, “यदि यह टैरिफ कुछ सप्ताहों तक लागू रहा तो इससे निवेश और रोजगार दोनों पर असर पड़ेगा।”
आगे की संभावनाएं
अब निगाहें अमेरिका और भारत के बीच आगामी द्विपक्षीय वार्ताओं पर टिकी हैं। यदि भारत अपने रूसी तेल आयात को जारी रखता है तो अमेरिकी कार्रवाई और कठोर हो सकती है। भारत सरकार को जल्द ही संतुलित रणनीति बनानी होगी जिससे घरेलू उद्योग और कूटनीतिक संबंध दोनों को संतुलित रखा जा सके।
स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!