पुतिन से मुलाकात के बाद बदले ट्रंप के सुर, फिलहाल राहत की उम्मीद
अमेरिका भारत पर 25% टैरिफ हटाने पर विचार कर रहा है, रूस से तेल आयात पर ट्रंप का बदला रुख
अलास्का। अमेरिका और रूस के बीच चल रही तनातनी और यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में भारत पर लगाए गए 25% सेकेंडरी टैरिफ को लेकर अब राहत की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि 27 अगस्त से लागू होने वाला यह टैरिफ टल सकता है।
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर यह अतिरिक्त टैरिफ इसलिए लगाया था क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। अमेरिका का तर्क था कि इससे रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। हालांकि, पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप ने नरमी दिखाते हुए कहा कि “अगर सेकेंडरी टैरिफ लगाया गया तो यह बेहद विनाशकारी होगा। जरूरत पड़ी तो इसे लागू करेंगे, लेकिन शायद इसकी जरूरत न पड़े।”

रूस से भारत की बढ़ती तेल खरीद
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर रखने वाली संस्था केप्लर की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने रूस से तेल आयात घटाने के बजाय बढ़ा दिया है। अगस्त में भारत ने रूस से लगभग 20 लाख बैरल प्रति दिन (BPD) तेल खरीदा, जबकि जुलाई में यह मात्रा 16 लाख बैरल प्रति दिन थी। यह बढ़ोतरी इराक और सऊदी अरब से आयात कम करने की कीमत पर हुई है।
- इराक से आयात: जुलाई के 907,000 बीपीडी से घटकर अगस्त में 730,000 बीपीडी।
- सऊदी अरब से आयात: जुलाई के 700,000 बीपीडी से घटकर अगस्त में 526,000 बीपीडी।
- अमेरिका की सप्लाई: 264,000 बीपीडी, जिससे अमेरिका भारत का पांचवां सबसे बड़ा सप्लायर बन गया।
ट्रंप का चीन और अन्य देशों पर संकेत
ट्रंप ने यह भी कहा कि फिलहाल चीन और अन्य देशों पर, जो रूस से तेल खरीद रहे हैं, टैरिफ लगाने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर यूक्रेन युद्ध खत्म करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दो-तीन हफ्तों में मास्को पर ही नहीं बल्कि उसके तेल खरीदार देशों पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
भारत की स्थिति
भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा जरूरतें रूस से आयातित तेल पर निर्भर हैं और वह अपनी नीतियां केवल घरेलू हितों को ध्यान में रखकर ही तय करेगा। भारत ने कहा था कि चाहे अमेरिकी टैरिफ लगे या न लगे, वह रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा।
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