August 30, 2025 4:04 AM

ट्रंप के वित्त मंत्री बोले- भारत दुनिया का बड़ा लोकतंत्र, अंत में हम हो लेंगे साथ

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जयशंकर के बयान के बाद नरम पड़ा अमेरिका, ट्रंप के वित्त मंत्री बोले- भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र, साथ आएंगे

जयशंकर के तीखे बयान के बाद अमेरिकी रुख में आई नरमी

वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव के बीच एक अहम मोड़ देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर बुधवार से 50 प्रतिशत शुल्क लागू किए जाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तल्खी आ गई थी। लेकिन इस बीच भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक तीखे बयान ने अमेरिकी राजनीति और मीडिया में हलचल मचा दी है। जयशंकर के रुख ने न केवल अमेरिका को सोचने पर मजबूर किया बल्कि वहां के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया में भी नरमी साफ दिखाई देने लगी है।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को मीडिया के सामने यह कहना पड़ा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। अंततः हम दोनों साथ आ ही जाएंगे। यह बयान अमेरिकी रुख में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

जयशंकर का सख्त संदेश

रूस से तेल खरीदी को लेकर लगातार अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर जयशंकर ने बेहद सख्त और साफ शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका को भारत द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदने और उसे शोधित कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने से समस्या है, तो फिर अमेरिका को भारत से परिष्कृत तेल ही खरीदना बंद कर देना चाहिए।

जयशंकर का यह बयान अमेरिकी टीवी चैनलों पर बड़ी बहस का विषय बन गया। खासतौर पर फॉक्स टीवी पर इसे लेकर चर्चा हुई और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को सीधे सवालों का सामना करना पड़ा।

अमेरिका की झुंझलाहट क्यों?

अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसे शोधित करता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमाता है। इससे रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और यूक्रेन युद्ध रोकने की कोशिशों में बाधा आती है।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह प्रक्रिया रूस के लिए एक आर्थिक सहारा साबित हो रही है।

लेकिन भारत का पक्ष यह है कि ऊर्जा जरूरतें किसी भी राष्ट्र के लिए सर्वोपरि होती हैं और भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं कर सकता। भारत ने अमेरिका की उस मांग को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें वह कुछ खास उत्पादों और क्षेत्रों पर शुल्क में छूट चाहता था। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाकर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया।

क्यों झुक रहा है अमेरिका?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भारत से दुश्मनी मोल लेने की स्थिति में नहीं है। भारत न केवल एशिया की सबसे बड़ी शक्ति है, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है। अमेरिकी कंपनियों और निवेशकों के लिए भारत एक विशाल बाजार है और इसे नज़रअंदाज़ करना संभव नहीं।
अमेरिकी वित्त मंत्री का बयान भी इसी बात की ओर इशारा करता है कि आखिरकार दोनों देशों को एक साथ आना ही होगा।

भारत का आत्मविश्वास

जयशंकर का रुख यह दिखाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों से समझौता नहीं करेगा।

आगे की राह

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और भारत के बीच फिर से बातचीत के दरवाजे खुलेंगे। दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं और एक-दूसरे की अनदेखी लंबे समय तक संभव नहीं। फिलहाल जयशंकर के बयान और अमेरिकी वित्त मंत्री की प्रतिक्रिया ने इस तनातनी को नए मोड़ पर ला दिया है।



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