ट्रंप के टैरिफ को संघीय अदालत ने बताया अवैध, बोले ट्रंप – टैरिफ हटे तो अमेरिका हो जाएगा बर्बाद
वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए आयात टैरिफ को लेकर बड़ा फैसला आया है। वॉशिंगटन की एक संघीय अपीलीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए अधिकतर आयात शुल्कों को अवैध करार दिया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाते हुए साफ कहा कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए मनमाने ढंग से टैरिफ लगाया था।
यह फैसला न केवल अमेरिका की आर्थिक नीतियों के लिए बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं, खासकर भारत और ब्राजील जैसे देशों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।
टैरिफ लगाने का विवाद
ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल में 10 फीसदी से लेकर 50 फीसदी तक के टैरिफ कई देशों के आयातित सामानों पर लगाए थे। इसका असर सीधे-सीधे वैश्विक व्यापार और द्विपक्षीय रिश्तों पर पड़ा।
- भारत और ब्राजील जैसे देशों पर अमेरिका ने 50% तक टैरिफ बढ़ा दिए थे।
- इस वजह से व्यापारिक संबंधों में तनाव पैदा हुआ और कई देशों ने पलटकर अमेरिका पर जवाबी शुल्क भी लगाए।
- ट्रंप का दावा था कि इन टैरिफ से अमेरिकी उद्योगों को सुरक्षा मिलेगी और घरेलू उत्पादन बढ़ेगा।
लेकिन आलोचकों का मानना था कि ट्रंप का यह कदम संरक्षणवादी नीति को बढ़ावा देता है और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है।

अदालत ने क्या कहा?
संघीय अपीलीय अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राष्ट्रपति को मिले अधिकार सीमित हैं और उनका इस्तेमाल केवल तभी किया जा सकता है जब किसी उत्पाद से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो।
- अदालत ने माना कि ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए जिन कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया, वह वैध कारणों से मेल नहीं खाते।
- अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति केवल राजनीतिक और राजस्व लाभ के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
यह फैसला ट्रंप की उस आर्थिक नीति को बड़ा झटका है, जिसमें वह दुनिया भर के देशों पर टैरिफ लगाकर अमेरिका के खजाने को भरना चाहते थे।
ट्रंप की प्रतिक्रिया
अदालत के फैसले के बाद ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर अमेरिका के टैरिफ हटाए गए तो “अमेरिका बर्बाद हो जाएगा।”
उन्होंने दोहराया कि टैरिफ ही वह रास्ता है जिससे अमेरिकी उद्योगों को मजबूती मिलेगी और विदेशी सामान पर निर्भरता घटेगी। ट्रंप का यह बयान साफ संकेत देता है कि रिपब्लिकन पार्टी और उनका खेमा इस मुद्दे को आने वाले चुनावों में भी उठाएगा।
भारत और दुनिया के लिए राहत
भारत सहित कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने लंबे समय से अमेरिकी टैरिफ को अनुचित ठहराया था।
- भारतीय निर्यातकों पर इन शुल्कों का सीधा असर पड़ा था, खासकर स्टील, एल्युमिनियम और कृषि उत्पादों पर।
- अब अदालत के इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिल सकती है।
- इससे न केवल भारतीय उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते भी सुधरने की संभावना है।
ब्राजील, यूरोपीय संघ और अन्य देश भी इस फैसले को राहत के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि ट्रंप प्रशासन की नीति ने वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर दिया था।
व्हाइट हाउस का रुख
हालांकि अदालत ने टैरिफ को अवैध करार दिया है, लेकिन व्हाइट हाउस का कहना है कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा। इसका मतलब है कि अंतिम निर्णय अभी बाकी है और आने वाले महीनों में इस मामले में कानूनी लड़ाई और लंबी खिंच सकती है।
व्यापक असर
यह फैसला अमेरिकी राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।
- डेमोक्रेटिक खेमे के लिए यह सबूत है कि ट्रंप ने राष्ट्रपति रहते हुए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया।
- वहीं रिपब्लिकन पार्टी इसे “अमेरिकी उद्योग बचाने का कदम” बताकर जनता के बीच पेश कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ हटते हैं तो वैश्विक व्यापार में सकारात्मक माहौल बनेगा और अमेरिका के साझेदार देशों को राहत मिलेगी। हालांकि ट्रंप और उनके समर्थक इसे अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा पर हमला मानते हैं।
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