ट्रम्प का बड़ा ऐलान: यूक्रेन को नाटो में जगह नहीं, क्रीमिया रूस को ही रहेगा; सुरक्षा गारंटी पर सहमति
वॉशिंगटन/कीव/मॉस्को। यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को साफ कर दिया कि यूक्रेन को नाटो (NATO) में शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि क्रीमिया अब कभी यूक्रेन को वापस नहीं मिलेगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि युद्ध जारी रखना या खत्म करना पूरी तरह से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के हाथ में है।
ट्रम्प का सख्त रुख
ट्रम्प ने कहा—“अगर जेलेंस्की चाहें तो रूस के साथ चल रहा युद्ध तुरंत खत्म हो सकता है। सवाल यह है कि वे लड़ाई जारी रखना चाहते हैं या शांति का रास्ता अपनाते हैं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2014 में बराक ओबामा के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान बिना गोली चले क्रीमिया रूस को सौंप दिया गया था और यूक्रेन तब भी नाटो में शामिल नहीं हुआ। ट्रम्प ने कहा, “कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं।”

विशेष दूत का दावा: सुरक्षा गारंटी पर सहमति
ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने CNN को दिए इंटरव्यू में बताया कि 15 अगस्त को अलास्का में ट्रम्प और पुतिन की बातचीत में एक महत्वपूर्ण सहमति बनी। इस सहमति के अनुसार, रूस यूक्रेन को नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी देने को तैयार है। हालांकि पुतिन ने यह भी साफ किया कि यूक्रेन की नाटो सदस्यता रूस के लिए “रेड लाइन” है और इस पर वह कभी समझौता नहीं करेंगे।
आर्टिकल-5 जैसी व्यवस्था की तैयारी
विटकॉफ के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका और यूरोपीय देश मिलकर यूक्रेन को नाटो के आर्टिकल-5 जैसी सुरक्षा गारंटी देंगे। आर्टिकल-5 के तहत यदि किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है तो उसे सभी पर हमला माना जाता है और सभी देश मिलकर जवाब देते हैं। इसी तरह की व्यवस्था के जरिए यूक्रेन को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की जा रही है कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी।
जेलेंस्की का आभार और शर्तें
इस बीच, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका द्वारा सुरक्षा गारंटी देने के फैसले को “ऐतिहासिक” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह गारंटी सिर्फ कागजों पर न हो, बल्कि इसमें यूरोपीय देशों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। जेलेंस्की ने यूरोप से अपील की कि वह 2022 की तरह एकजुट होकर आगे आए। उन्होंने कहा—“जब युद्ध शुरू हुआ था, तब यूरोप ने मजबूती से हमारा साथ दिया। आज भी वैसी ही एकजुटता जरूरी है, ताकि असली शांति स्थापित हो सके।”

विश्लेषण: समाधान की ओर बढ़ते कदम या नई दुविधा?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ट्रम्प और पुतिन की हालिया मुलाकात और सुरक्षा गारंटी का प्रस्ताव युद्ध के समाधान की दिशा में अहम कदम हो सकता है। लेकिन नाटो सदस्यता से इनकार और क्रीमिया को रूस के पास मान लेने की शर्तें यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती हैं।
- रूस का लाभ: क्रीमिया पर स्थायी नियंत्रण और नाटो विस्तार पर रोक।
- यूक्रेन की दुविधा: संप्रभुता पर समझौता किए बिना सुरक्षा गारंटी को कैसे स्वीकार करे।
- अमेरिका और यूरोप की चुनौती: सुरक्षा गारंटी को वास्तविक और भरोसेमंद बनाना।
युद्ध की शुरुआत से अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और हजारों की जान जा चुकी है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ रहा है कि शांति की ठोस राह निकाली जाए। ट्रम्प के बयान और प्रस्तावित डील ने कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है, लेकिन वास्तविक समाधान कितना व्यावहारिक होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
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