संसद में सत्ता पक्ष-विपक्ष टकराव तेज, महिला सांसदों की शिकायतों के बाद बढ़ा विवाद
नई दिल्ली। संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध अब और गहराता नजर आ रहा है। सदन में विपक्ष द्वारा राहुल गांधी को बोलने का मौका न देने का आरोप लगाते हुए लगातार हंगामा किया जा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्षी सांसदों के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस बीच केंद्रीय संसदीय मंत्री किरन रिजिजू के ताजा बयान ने 4 फरवरी को लोकसभा में हुए घटनाक्रम को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
रिजिजू ने क्या कहा
किरन रिजिजू ने कहा कि उस दिन सदन का माहौल काफी उग्र था और स्थिति ऐसी बन गई थी कि उन्हें अपने सांसदों को समझाना पड़ा कि वे विपक्षी सदस्यों के साथ किसी भी तरह की धक्का-मुक्की में न उलझें। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि सदन के भीतर टकराव की स्थिति बेहद तनावपूर्ण रही होगी। उन्होंने विपक्षी सांसदों के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
महिला सांसदों की चिट्ठियों से बढ़ा विवाद
सोमवार को विपक्ष की महिला सांसदों ने ओम बिरला को पत्र लिखकर उन पर पक्षपात का आरोप लगाया था। इसके जवाब में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों ने भी स्पीकर को पत्र सौंपा और सदन में कथित उग्र व्यवहार के लिए विपक्षी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इन चिट्ठियों के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
सत्ता पक्ष का पलटवार
रिजिजू ने कहा कि खासकर महिला सांसदों ने कांग्रेस के कुछ सदस्यों के व्यवहार को लेकर आपत्ति जताई है और इसकी औपचारिक शिकायत की गई है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सदन की कार्यवाही को बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनका दावा है कि विपक्ष जानबूझकर टकराव की स्थिति बना रहा है।
विपक्ष का आरोप
दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा, जिसके कारण उन्हें विरोध दर्ज कराना पड़ रहा है। विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बता रहे हैं और सरकार पर आवाज दबाने का आरोप लगा रहे हैं। इसी वजह से संसद में पिछले कुछ दिनों से कामकाज प्रभावित होता दिख रहा है।
बढ़ती तल्खी से प्रभावित हो रही कार्यवाही
लगातार बढ़ती बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाना मुश्किल हो रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद नहीं बढ़ा, तो आने वाले दिनों में गतिरोध और गहरा सकता है।
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