देश में तीन तरह का मौसम: कहीं गर्मी का असर, कहीं बर्फबारी और कई राज्यों में वर्षा की चेतावनी
नई दिल्ली/जयपुर। फरवरी के अंतिम सप्ताह में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के तीन अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक ओर राजस्थान और झारखंड के कुछ जिलों में तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर में सिक्किम में भारी बर्फबारी ने जनजीवन को प्रभावित किया है। वहीं दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत पूर्व और पश्चिम भारत के करीब 10 राज्यों में वर्षा का पीला अलर्ट जारी किया गया है।
राजस्थान के बाड़मेर और झारखंड के सरायकेला-चाईबासा जिलों में फरवरी के महीने में ही तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। सामान्यतः यह तापमान मार्च के मध्य या अंत में देखने को मिलता है, लेकिन इस बार मौसम में असामान्य तेजी से बदलाव ने लोगों को चौंका दिया है। दिन के समय तेज धूप और शुष्क हवाओं के कारण गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है।
मध्य प्रदेश में चौथी बार बारिश की संभावना
दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों पर पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में फरवरी माह में चौथी बार वर्षा की संभावना जताई गई है। आज प्रदेश के आठ जिलों में वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। इससे पहले फरवरी की शुरुआत में ही प्रदेश के कई हिस्सों में ओलावृष्टि, वर्षा और तेज आंधी का दौर देखा जा चुका है। लगातार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि फसलों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय पश्चिमी विक्षोभ और निम्न दबाव तंत्र की सक्रियता के कारण मौसम में यह उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में कोहरे और ठंड का असर बना हुआ है, जबकि मैदानी राज्यों में दिन का तापमान सामान्य से अधिक चल रहा है।
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सिक्किम में बर्फबारी: 350 वाहन फंसे
पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में रविवार को हुई बर्फबारी ने यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया। शेरेथांग इलाके में जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर सिप्सू और 16वें माइल के बीच त्सांगू के पास करीब 350 पर्यटक वाहन बर्फ में फंस गए। इनमें 46 बच्चे भी शामिल थे। बर्फबारी के कारण सड़क पर फिसलन और दृश्यता कम होने से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना ने त्वरित कार्रवाई की। सभी फंसे पर्यटकों को अस्थायी रूप से 17वें माइल स्थित सेना के पारगमन शिविर में भेजा गया, जहां उन्हें सुरक्षित स्थान और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई। एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
मौसम का असामान्य उतार-चढ़ाव
देश में एक साथ तीन प्रकार के मौसम का असर सामान्य स्थिति नहीं माना जा रहा। एक ओर उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और ठंड, दूसरी ओर पश्चिमी और पूर्वी राज्यों में तेज गर्मी, और साथ ही कई राज्यों में वर्षा की चेतावनी—यह सब फरवरी के अंतिम सप्ताह में मौसम की अस्थिरता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय प्रणालियों की सक्रियता के कारण ऐसे असामान्य पैटर्न देखने को मिल रहे हैं।
आने वाले दिनों में मौसम विभाग की निगरानी और चेतावनियां महत्वपूर्ण होंगी, क्योंकि फसल, पर्यटन और आम जनजीवन पर इन परिवर्तनों का सीधा प्रभाव पड़ रहा है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की आवश्यकता है।
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