बढ़ते वैश्विक टैरिफ के बीच भारत-यूरोप सहयोग को लेकर पोलैंड ने जताई बड़ी उम्मीद
नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद और टैरिफ की मार झेल रहे पोलैंड ने अब नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश तेज कर दी है। इसी कड़ी में भारत के साथ संभावित आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को लेकर पोलैंड की ओर से सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने भारत दौरे के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में पोलैंड को नए भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर की जरूरत है और भारत इस दिशा में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहा है।
भारत दौरे को बताया अहम, फ्री ट्रेड पर दिया जोर
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि जब दुनिया के कुछ हिस्सों से बढ़े हुए टैरिफ का सामना करना पड़ता है, तब किसी भी देश के लिए नए व्यापारिक साझेदार ढूंढना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि भारत ने पोलैंड के साथ जुड़ने की इच्छा दिखाई है, जो दोनों देशों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। सिकोरस्की ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि ऐसे क्षेत्र और देश अभी भी मौजूद हैं, जो मुक्त व्यापार में विश्वास रखते हैं और खुले बाजार की अवधारणा का समर्थन करते हैं।
अमेरिका के टैरिफ से ईयू देशों पर दबाव
पोलैंड के विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक रिश्तों में बदलाव देखने को मिला है। पिछले साल अमेरिका ने यूरोपीय संघ के साथ एक ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया था, जिसके तहत पोलैंड समेत ईयू के अधिकांश देशों से आने वाले सामानों पर लगभग 15 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया गया। इस फैसले का असर यूरोपीय उद्योगों और निर्यात पर पड़ा है, जिससे पोलैंड जैसे देशों के लिए वैकल्पिक बाजार और साझेदारों की तलाश जरूरी हो गई है।
भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अंतिम दौर में
इसी बीच भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। पोलैंड के उप प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ईयू के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उनका मानना है कि दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकती हैं, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से गुजर रहा है।
कृषि और उद्योग में सहयोग की बड़ी संभावनाएं
राडोस्लाव सिकोरस्की ने स्पष्ट किया कि भले ही कुछ उद्योग संवेदनशील माने जाते हों, लेकिन भारत और ईयू के कृषि क्षेत्र काफी हद तक एक-दूसरे के साथ अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि इस सेक्टर में सहयोग की बहुत ज्यादा गुंजाइश है। उन्होंने यूरोपीय संघ की संरचना का भी जिक्र किया और कहा कि एक कॉन्फेडरेशन के तौर पर ईयू में सदस्य देशों, यूरोपियन पार्लियामेंट और यूरोपियन कमीशन के बीच संतुलन बना रहता है, जिससे यह एक प्रेडिक्टेबल और भरोसेमंद सिंगल मार्केट बनता है। यही स्थिरता ईयू को दुनिया के लिए एक आकर्षक व्यापारिक साझेदार और निवेश गंतव्य बनाती है।
16वें ईयू-इंडिया समिट पर टिकी निगाहें
पोलैंड के उप प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चल रही बातचीत सफल होगी और इससे दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह समझौता 27 जनवरी को होने वाले 16वें ईयू-इंडिया समिट के दौरान अंतिम रूप ले सकता है। इस समिट में एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन के भारत दौरे की भी उम्मीद है।
भारत-पोलैंड रिश्तों को मिल सकता है नया आयाम
राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सफल होता है, तो इसका सीधा फायदा पोलैंड जैसे देशों को भी मिलेगा। इससे भारत-पोलैंड व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा मिल सकती है और दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीक और बाजार तक पहुंच के नए रास्ते खुल सकते हैं। मौजूदा वैश्विक हालात में यह साझेदारी दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है।
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