लोकतांत्रिक परंपराओं के केंद्र संविधान सदन से वैश्विक संसदीय संवाद का संदेश
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को संसद परिसर स्थित संविधान सदन में 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कॉमनवेल्थ के 42 देशों से 61 स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स भाग ले रहे हैं, जबकि चार अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए हैं। सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि जिस स्थान पर सभी प्रतिनिधि बैठे हैं, वह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि यह वही केंद्रीय कक्ष है, जहां गुलामी के अंतिम वर्षों में भारत के संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा की ऐतिहासिक बैठकें हुई थीं। स्वतंत्रता के बाद 75 वर्षों तक यही भवन भारत की संसद रहा और इसी हॉल में देश के भविष्य से जुड़े अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। लोकतंत्र को समर्पित इस विरासत को सम्मान देने के लिए भारत ने इस भवन को “संविधान सदन” नाम दिया है।
#WATCH | Delhi | Addressing the 28th CSPOC, Prime Minister Narendra Modi says, "This is the fourth time the Commonwealth Speakers and Presiding Officers Conference is being held in India. This year's theme—"Effective Delivery of Parliamentary Democracy"—is highly relevant in… pic.twitter.com/YMjHgqHevc
— ANI (@ANI) January 15, 2026
चौथी बार भारत में हो रहा कॉमनवेल्थ स्पीकर्स सम्मेलन
प्रधानमंत्री ने बताया कि यह चौथा अवसर है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन भारत में हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सम्मेलन की थीम “संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी” रखी गई है, जो वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक है। आज जब दुनिया के कई हिस्सों में लोकतांत्रिक संस्थानों की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं, ऐसे में यह सम्मेलन सामूहिक चिंतन और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी विविधता को लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत में बदला है। आज भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि मजबूत लोकतांत्रिक संस्थान और पारदर्शी लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं किसी भी देश को स्थिरता, गति और व्यापक स्तर पर विकास देने में सक्षम होती हैं।
भारत की लोकतांत्रिक यात्रा पर वैश्विक संदेह, जिसे भारत ने गलत साबित किया
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता के समय की परिस्थितियों को याद करते हुए कहा कि जब भारत आजाद हुआ था, तब अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह आशंका जताई जा रही थी कि इतनी अधिक भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता वाला देश लोकतंत्र को लंबे समय तक कैसे संभाल पाएगा। लेकिन भारत ने इन सभी शंकाओं को गलत साबित किया। भारत ने न केवल लोकतंत्र को टिकाए रखा, बल्कि उसे और अधिक मजबूत किया और अपनी विविधता को लोकतांत्रिक शक्ति में परिवर्तित किया।
भारत की वैश्विक उपलब्धियों का उल्लेख
संविधान सदन में आयोजित सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की वर्तमान वैश्विक स्थिति पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट सिस्टम दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान नेटवर्क बन चुका है। भारत आज विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है और स्टील उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हो चुका है। इसके साथ ही भारत अब विश्व का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट बन गया है। रेलवे नेटवर्क के मामले में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है, जबकि मेट्रो रेल नेटवर्क के आकार में भारत तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि ये सभी उपलब्धियां मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनभागीदारी का परिणाम हैं।
#WATCH | Delhi | Addressing the 28th CSPOC, Prime Minister Narendra Modi says, "Another strong pillar of Indian democracy is women's representation. Today, Indian women are not only participating in democracy but also leading it. The President of India, who is the first citizen… pic.twitter.com/QzYI7o4QVk
— ANI (@ANI) January 15, 2026
संविधान सदन का ऐतिहासिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान सदन के नामकरण के पीछे की भावना को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा का प्रतीक है। इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा ने भारत के संविधान का निर्माण किया, जिसने देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया। आज भी यह स्थान लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों की याद दिलाता है।
वैश्विक संसदीय सहयोग का मंच
कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस को संसदीय सहयोग और संवाद का अहम मंच माना जाता है। इस सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न देशों के संसद प्रमुख अपने-अपने अनुभव साझा करते हैं, चुनौतियों पर चर्चा करते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार करते हैं। भारत में आयोजित यह सम्मेलन वैश्विक लोकतांत्रिक संवाद को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत लोकतंत्र की वैश्विक यात्रा में एक जिम्मेदार भागीदार है और भविष्य में भी लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाता रहेगा।
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