छात्रों से संवाद में आत्मबल, सहयोग और अनुशासन पर जोर
नई दिल्ली । नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण के दूसरे चरण में देशभर से जुड़े विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए तकनीक के उपयोग, अभ्यास की आदत, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता पर विस्तार से बात की। नई दिल्ली से आयोजित इस कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों के विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और सवाल पूछे, जिनका प्रधानमंत्री ने सहज शैली में जवाब दिया। मोदी ने स्पष्ट कहा कि तकनीक आधुनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसका उपयोग साधन के रूप में होना चाहिए, स्वामी के रूप में नहीं। उनका कहना था कि विद्यार्थी यदि तकनीक को अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए अपनाते हैं तो यह उनके लिए वरदान बन सकती है, परंतु यदि वे इसके अधीन हो जाते हैं तो ध्यान भटकने का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरी सबसे बड़ी चीज है, जो आज लोगों के ध्यान में नहीं है, वो है नींद।
— BJP LIVE (@BJPLive) February 9, 2026
अच्छी नींद लेनी ही चाहिए।
पूरी नींद लेने के बाद बाकी समय आपका मन बहुत प्रफुल्लित रहता है।
-पीएम @narendramodi#ParikshaPeCharcha26pic.twitter.com/iuSZL7N0FC
पढ़ाई के साथ लिखने का अभ्यास जरूरी
प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि केवल पढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लिखकर अभ्यास करना सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी उत्तर लिखने की आदत डालते हैं, तो विषय की समझ गहरी होती है और परीक्षा के समय आत्मविश्वास बढ़ता है। नियमित रूप से प्रश्न पत्र हल करने और समय प्रबंधन के साथ अभ्यास करने से घबराहट कम होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी कहा कि पुराने परीक्षा अनुभवों को याद करें। उस समय भी तनाव महसूस हुआ होगा, लेकिन परीक्षा समाप्त होने के बाद वही तनाव महत्वहीन लगने लगता है। इस सोच से वर्तमान दबाव को हल्का किया जा सकता है।
कमजोर साथियों का हाथ थामने की अपील
संवाद के दौरान मोदी ने कक्षा में पीछे रह जाने वाले विद्यार्थियों की मदद करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जिन विषयों में आप मजबूत हैं, उनमें अपने साथियों को समझाइए। जब आप किसी और को पढ़ाते हैं तो खुद की समझ भी और बेहतर हो जाती है। इससे कक्षा में सहयोग का माहौल बनता है और प्रतिस्पर्धा सकारात्मक दिशा में जाती है।
हर यात्रा को सीखने का अवसर बनाएं
प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि घूमने-फिरने के अवसर को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखें। उन्होंने कहा कि पहले अपने आसपास के क्षेत्रों को जानिए, फिर जिले और राज्य को समझिए। जहां भी जाएं, एक विद्यार्थी की नजर से देखें, ताकि हर अनुभव से कुछ नया सीखने को मिले। सीखने की यह निरंतरता जीवन भर काम आती है।
निडरता से विकसित होती है नेतृत्व क्षमता
मोदी ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि नेतृत्व का मूल मंत्र निडरता है। यदि मन में यह ठान लिया जाए कि जरूरी काम को खुद आगे बढ़कर करना है, तो दूसरों पर उसका सकारात्मक असर पड़ता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि आप कहीं पड़ा कचरा उठाते हैं, तो आसपास के लोग भी वैसा करने के लिए प्रेरित होते हैं। इस तरह छोटे कदम बड़े बदलाव का कारण बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री का पूरा संदेश विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, अनुशासित और संवेदनशील बनने की दिशा में प्रेरित करने वाला रहा। तकनीक का संतुलित उपयोग, नियमित अभ्यास, सहयोग की भावना और निडरता—इन सभी को उन्होंने परीक्षा और जीवन, दोनों में सफलता का आधार बताया।
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