पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक कड़ाके की ठंड, कोहरे और बर्फीली हवाओं से जनजीवन प्रभावित
नई दिल्ली/जयपुर। देश के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में सर्दी ने अपना सबसे कठोर रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं मैदानी राज्यों में बर्फीली हवाओं और घने कोहरे ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं, जबकि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में भी ठंड का असर तेजी से बढ़ रहा है। उत्तराखंड में लगातार तीसरे दिन दो प्रमुख इलाकों में तापमान माइनस 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पिथौरागढ़ जिले के आदि कैलाश और रुद्रप्रयाग स्थित केदारनाथ धाम में कड़ाके की ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अत्यधिक ठंड के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में जनजीवन लगभग ठहर सा गया है। चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिलों में पानी की पाइपलाइनें जम गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है और लोग बर्फ पिघलाकर या वैकल्पिक स्रोतों से पानी जुटाने को मजबूर हैं।
उत्तराखंड में बर्फबारी से बढ़ी मुश्किलें
लगातार बर्फबारी और शून्य से नीचे तापमान के चलते केदारनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। सड़कों पर बर्फ जमने से आवाजाही प्रभावित हो रही है। प्रशासन द्वारा आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अत्यधिक ठंड के कारण मरम्मत और राहत कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं। पाइपलाइन जमने से अस्पतालों, आश्रमों और स्थानीय बस्तियों में पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड से राहत मिलने के आसार कम हैं।
राजस्थान में शीतलहर का प्रकोप, जैसलमेर सबसे ठंडा
इधर, पहाड़ी राज्यों से आ रही बर्फीली हवाओं ने राजस्थान में सर्दी को और तीखा कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान तेजी से गिरा है। शुक्रवार को जैसलमेर प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने राजस्थान के 13 जिलों में कोहरे और शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। रात और सुबह के समय ठंड का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। राज्य के सीमावर्ती और रेगिस्तानी इलाकों में तेज ठंडी हवाओं के कारण लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेने को मजबूर हैं। खेतों में काम करने वाले मजदूरों और खुले में रहने वाले लोगों के लिए यह मौसम खासा मुश्किल भरा साबित हो रहा है।
बिहार और उत्तर प्रदेश में घना कोहरा, यातायात पर असर
बिहार के 32 जिलों में घना कोहरा छाया हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, विजिबिलिटी घटकर करीब 10 मीटर तक रहने की संभावना है। कोहरे के कारण सड़क और रेल यातायात पर व्यापक असर पड़ रहा है। वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। प्रदेश के करीब 30 शहरों में शनिवार सुबह घना कोहरा छाया रहा। कोहरे का सीधा असर ट्रेनों और उड़ानों पर पड़ा है। गोरखपुर, लखनऊ और वाराणसी समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर 50 से ज्यादा ट्रेनें देरी से चल रही हैं। कुछ ट्रेनें तो 8 से 10 घंटे तक लेट बताई जा रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। लखनऊ, गोरखपुर और वाराणसी एयरपोर्ट पर पांच से अधिक फ्लाइट्स अपने निर्धारित समय से देरी से पहुंचीं। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा और कई उड़ानों के समय में बदलाव किया गया।
मध्य प्रदेश में भी बढ़ी ठंड
मध्य प्रदेश में भी ठंड का असर साफ दिखाई देने लगा है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। शनिवार सुबह प्रदेश के 15 से ज्यादा जिलों में घना कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना जताई है। ठंड और कोहरे के चलते सुबह के समय दृश्यता कम रहने से सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
अगले एक हफ्ते तक कड़ाके की सर्दी के आसार
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के बड़े हिस्से में अगले एक सप्ताह तक कड़ाके की सर्दी पड़ने की संभावना है। कई राज्यों में 16 जिलों का तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच चुका है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में शीतलहर व कोहरे का यह दौर फिलहाल थमने वाला नहीं दिख रहा है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है।
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