अस्पताल में दो और घायलों ने तोड़ा दम, गैर-कानूनी खदान में हुआ था विस्फोट, परिजनों को मुआवजे की घोषणा
नई दिल्ली। मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में कोयला खदान में हुए भीषण धमाके के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। मंगलवार को इलाज के दौरान दो और घायलों की मौत हो गई। दोनों मजदूर असम के कछार जिले के कटिगोराह क्षेत्र के रहने वाले थे और उनका उपचार सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में चल रहा था। लगातार बढ़ती मौतों की संख्या ने हादसे की गंभीरता को और गहरा कर दिया है।
अस्पताल में दम तोड़ते जा रहे घायल
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कोयला खदान विस्फोट में घायल हुए दो लोगों ने सोमवार रात अस्पताल में अंतिम सांस ली। मृतकों की पहचान रामचंद्र बैष्णब और निमारुद्दीन के रूप में हुई है। पांच फरवरी को हुए इस हादसे के बाद कुल नौ घायल खनिकों को सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद कुछ की हालत गंभीर बनी हुई थी, जिनमें से दो ने अब दम तोड़ दिया।
गैर-कानूनी खदान में हुआ था विस्फोट
जानकारी के अनुसार धमाका मेघालय से सटे म्यंसंगट गांव के दूर थांगस्कू इलाके में संचालित एक अवैध कोयला खदान में हुआ था। इस घटना ने एक बार फिर अवैध खनन गतिविधियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी संख्या में मजदूर वहां किस परिस्थितियों में काम कर रहे थे और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।
न्यायिक जांच के आदेश
मेघालय सरकार ने हादसे की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच के माध्यम से विस्फोट के कारणों, जिम्मेदार लोगों और सुरक्षा में हुई चूक का पता लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
असम सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
इस दुखद हादसे में असम के कछार जिले के कम से कम आठ मजदूरों की मौत हो चुकी है। इसे देखते हुए असम सरकार ने राज्य के प्रत्येक मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। परिजनों का कहना है कि आर्थिक मदद जरूरी है, लेकिन सबसे अहम यह है कि ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
कई सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
लगातार सामने आ रही जानकारियों से यह स्पष्ट हो रहा है कि खदान में सुरक्षा इंतजाम नाकाफी थे। विस्फोट के बाद राहत और बचाव कार्य चलाया गया, लेकिन दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण शुरुआती घंटों में मदद पहुंचने में दिक्कतें आईं। इस हादसे ने खनन क्षेत्रों में श्रमिकों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
इस त्रासदी ने पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को झकझोर दिया है। मृतकों के परिवारों में शोक और गुस्सा दोनों है, जबकि सरकारें राहत और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में लगी हैं।
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