राउज एवेन्यू कोर्ट का अहम आदेश, लालू-राबड़ी-तेजस्वी समेत 41 आरोपियों पर चलेगा मुकदमा
नई दिल्ली। जमीन के बदले नौकरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश भी दिए थे।
अदालत की टिप्पणी: पद का दुरुपयोग कर की गई आपराधिक गतिविधियां
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया। अदालत के अनुसार, इस दौरान संगठित तरीके से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया गया। न्यायालय ने माना कि यादव परिवार ने रेल अधिकारियों और करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीनें हासिल कीं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश की श्रेणी में आती हैं।
41 आरोपियों पर आरोप तय, 52 को मिली राहत
अदालत ने इस मामले में कुल 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं, जबकि 52 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। बरी किए गए लोगों में कुछ रेल अधिकारी भी शामिल हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो की चार्जशीट में कुल 103 आरोपियों के नाम दर्ज थे, जिनमें से पांच की मृत्यु हो चुकी है, जिसकी जानकारी जांच एजेंसी ने अदालत को दी थी।
किन धाराओं में तय हुए आरोप
अधिवक्ता अजाज अहमद के अनुसार, अदालत ने लालू प्रसाद यादव, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि औपचारिक रूप से आरोप 29 जनवरी को तय किए जाएंगे।
पहले से तय थी तारीख, आज आया बड़ा फैसला
इससे पहले 19 दिसंबर को हुई सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने संकेत दिया था कि आरोप तय करने से संबंधित आदेश 9 जनवरी को सुबह 10:30 बजे सुनाया जाएगा। उसी क्रम में शुक्रवार को अदालत ने विस्तृत आदेश जारी करते हुए आरोप तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया।
सीबीआई का आरोप: नियमों को दरकिनार कर दी गईं नौकरियां
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2004 से 2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे, उस दौरान भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र, जबलपुर में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां नियमों को ताक पर रखकर की गईं।
जमीन के बदले नौकरी का आरोप
सीबीआई का दावा है कि इन नौकरियों को उन लोगों को दिया गया, जिन्होंने लालू यादव के परिवार या उनके करीबी सहयोगियों के नाम पर जमीन उपहार में दी या ट्रांसफर की। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां भी शामिल थीं, जिन्हें आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार का हिस्सा माना गया है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें सत्ता का दुरुपयोग कर निजी लाभ उठाया गया।
राजनीतिक हलकों में हलचल
अदालत के इस आदेश के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के लिए यह फैसला ऐसे समय आया है, जब बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में उसकी भूमिका अहम बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और आरोप तय होने की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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