सुरक्षा बलों का सघन अभियान, स्थानीय मदद के बिना संभव नहीं था आतंकी ठिकाने तक रसद पहुंचना

किश्तवाड़। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का तलाशी अभियान लगातार तीसरे दिन भी जारी है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में चल रहे इस ऑपरेशन के दौरान जवानों को आतंकियों के एक ऐसे ठिकाने का पता चला है, जिसने उनकी लंबे समय तक इलाके में मौजूद रहने की तैयारी और रणनीतिक योजना को उजागर कर दिया है। पत्थरों से तैयार इस ठिकाने को ऊपर से तिरपाल डालकर पूरी तरह छिपाया गया था, जिससे यह दूर से नजर नहीं आता था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह ठिकाना केवल अस्थायी नहीं था, बल्कि इसे लंबे समय के लिए तैयार किया गया था।

जंगल के बीच बना ठिकाना, महीनों की तैयारी के संकेत

सुरक्षा बलों द्वारा खोजे गए इस हाइडआउट में भारी मात्रा में राशन और रोजमर्रा की जरूरत का सामान मिला है। ठिकाने के अंदर गैस सिलेंडर, चूल्हा, चावल, गेहूं का आटा, मसाले, इंस्टेंट नूडल्स, अधपके अंडे और ताजी सब्जियां मौजूद थीं। फर्श पर बिछे कंबल इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहां लंबे समय से आतंकियों का आना-जाना रहा है। अधिकारियों के अनुसार राशन की मात्रा इतनी अधिक थी कि इससे साफ होता है कि आतंकी यहां कुछ दिनों के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक ठहरने की योजना बनाकर आए थे। जंगल के बीच ढलान पर बने इस ठिकाने की लोकेशन भी बेहद सोच-समझकर चुनी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जगह इतनी रणनीतिक थी कि सामान्य नजर से इसे पहचान पाना मुश्किल था। चारों ओर ऊंचे पेड़ और झाड़ियां थीं, जिससे यह ठिकाना पूरी तरह छिपा रहता था। यह आतंकियों की टैक्टिकल प्लानिंग और इलाके की गहरी रेकी को दर्शाता है।

स्थानीय नेटवर्क की भूमिका पर सवाल

सुरक्षा बलों का साफ कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में राशन और सामग्री का इस तरह के दुर्गम इलाके तक पहुंचना बिना स्थानीय मदद के संभव नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक केवल सीमा पार से इतनी सप्लाई पहुंचना व्यावहारिक नहीं है। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि आतंकियों को स्थानीय स्तर पर किसी न किसी तरह का सहयोग मिल रहा है। अब जांच एजेंसियां इस पहलू पर भी गहन जांच कर रही हैं कि किन माध्यमों से यह रसद पहुंचाई गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के तहत संयुक्त कार्रवाई

इलाके में छिपे आतंकियों की तलाश के लिए सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ चला रही हैं। अधिकारियों के अनुसार जंगलों में 2 से 3 आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका है, जिनका संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से बताया जा रहा है। इसी आधार पर सर्च ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है। ड्रोन, खोजी कुत्तों और आधुनिक तकनीक की मदद से हर संभावित रास्ते और ठिकाने की जांच की जा रही है। यह मुठभेड़ और तलाशी अभियान इस साल जम्मू क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच तीसरी बड़ी झड़प मानी जा रही है। इससे पहले 7 से 13 जनवरी के बीच कठुआ जिले के बिलावर क्षेत्र के कहोग और नजोते जंगलों में भी मुठभेड़ हुई थी, हालांकि उस दौरान किसी के मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई थी। अब किश्तवाड़ में मिले ठिकाने ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।

बिलावर और कठुआ में नष्ट किए गए आतंकी ठिकाने

सुरक्षा बलों का कहना है कि बीते दिनों में बिलावर और कठुआ क्षेत्रों में आतंकियों के छोटे-बड़े तीन ठिकानों को पहले ही नष्ट किया जा चुका है। इन कार्रवाइयों के बाद माना जा रहा था कि आतंकियों की गतिविधियां कमजोर पड़ी हैं, लेकिन किश्तवाड़ में मिले नए ठिकाने से साफ है कि आतंकी संगठन अब भी जंगलों और पहाड़ी इलाकों को सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि वे आने वाले समय में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में हो सकते हैं।

गोलीबारी में घायल जवान शहीद, आज होगा अंतिम संस्कार

इस अभियान के दौरान एक दुखद खबर भी सामने आई है। आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान घायल हुए हवलदार गजेंद्र सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। सेना के अधिकारियों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तराखंड के बागेश्वर निवासी हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का पार्थिव शरीर हेलिकॉप्टर से बागेश्वर लाया जाएगा और इसके बाद उनके पैतृक गांव ग्राम पंचायत बिथ्थी (पाण्याती) में 20 जनवरी को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। जानकारी के अनुसार अभियान के दौरान अचानक हुए ग्रेनेड हमले में हवलदार गजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। छर्रे लगने से उन्हें गहरी चोटें आईं और 18-19 जनवरी की रात राज्य के एक सैन्य अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी शहादत से पूरे इलाके में शोक की लहर है और लोग उन्हें एक बहादुर सपूत के रूप में याद कर रहे हैं।

बढ़ती चुनौती और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता

किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में चल रहे इस ऑपरेशन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जम्मू क्षेत्र में आतंकी गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीर चुनौती मानते हुए हर स्तर पर सतर्कता बढ़ा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक तलाशी अभियान जारी रहेगा। साथ ही स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा बलों को दें।