ढाका में औपचारिक कार्यक्रम के दौरान हुई संक्षिप्त मुलाकात, भारत-पाक रिश्तों में कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों बांग्लादेश की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इसी दौरान ढाका में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के मौके पर उन्होंने पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से शिष्टाचारवश हाथ मिलाया। इस सामान्य कूटनीतिक व्यवहार को पाकिस्तान ने बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हुए इसे भारत-पाक संबंधों में कथित नरमी के रूप में प्रचारित करने की कोशिश शुरू कर दी है।

शिष्टाचार को कूटनीतिक संकेत बताने की कोशिश

पाकिस्तान की ओर से जारी बयान में दावा किया गया कि विदेश मंत्री जयशंकर स्वयं कार्यक्रम के दौरान अयाज सादिक के पास गए और उनसे हाथ मिलाया। इस घटना को पाकिस्तान ने अपनी पीठ थपथपाने के अंदाज में पेश करते हुए इसे बातचीत और सहयोग के प्रति अपने कथित सकारात्मक रुख से जोड़ने का प्रयास किया। बयान में यह भी कहा गया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान लगातार बातचीत, संयम और सहयोग की बात करता रहा है, जिसमें शांति वार्ता और संयुक्त जांच के प्रस्ताव शामिल बताए गए।

पहलगाम हमले के बाद बिगड़े रिश्ते

वास्तविकता यह है कि इस वर्ष की शुरुआत में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में गंभीर तनाव आ गया था। इस हमले के बाद भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारत ने पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक जुड़ाव को सीमित कर दिया और कई सख्त नीतिगत कदम उठाए।

सिंधु जल संधि और अन्य कड़े फैसले

हमले के बाद भारत ने 1960 में हुई सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी को निलंबित कर दिया था। यह वही ऐतिहासिक समझौता है जिसे विश्व बैंक की मध्यस्थता में लागू किया गया था। इस फैसले ने साफ कर दिया कि भारत सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को कितनी गंभीरता से ले रहा है। इसके साथ ही सीमा पार आवाजाही और अन्य द्विपक्षीय गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए।

आतंक के खिलाफ सख्त रुख

भारत ने यह भी दोहराया कि किसी भी तरह के संवाद से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई करनी होगी। इसी क्रम में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की। इन अभियानों के जरिए भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह नागरिकों को निशाना बनाने वाले हमलों का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा।

सामान्य मुलाकात, कोई नीति परिवर्तन नहीं

कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शिष्टाचारवश हाथ मिलाना सामान्य प्रक्रिया है और इसे नीति परिवर्तन या संबंधों में सुधार का संकेत मानना गलत है। भारत की आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है और पाकिस्तान के दावों को केवल आंतरिक प्रचार के तौर पर देखा जा रहा है।