यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर हमले से वैश्विक चिंता, ईरान में सैकड़ों मौतों का दावा
तेल अवीव/तेहरान। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष चौथे दिन और अधिक तीखा हो गया है। ताजा घटनाक्रम में इजराइल द्वारा ईरान की ऐतिहासिक धरोहर माने जाने वाले गोलिस्तान महल को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, हमले में महल का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, हालांकि वहां संरक्षित कीमती और ऐतिहासिक वस्तुओं को पहले ही सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था, जिससे वे बच गईं।
गोलिस्तान महल का निर्माण 16वीं सदी में सफवीद शासनकाल के दौरान हुआ था। यह लंबे समय तक ईरान के शासकों का निवास और सत्ता का प्रमुख केंद्र रहा। ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के कारण इसे 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। इस स्थल पर हमले की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
संघर्ष का चौथा दिन और बढ़ती सैन्य कार्रवाई
28 फरवरी से शुरू हुए इस सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के 1000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं। शुरुआती 30 घंटों में ही 2000 से अधिक बम गिराए जाने का दावा किया गया है।
अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। 750 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन संघर्ष की तीव्रता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत भी इसी संघर्ष के शुरुआती चरण में हुई थी, जिससे देश में राजनीतिक और सैन्य स्थिति और जटिल हो गई है।
रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला
दूसरी ओर, फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के दो ड्रोन ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया। हालांकि इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। यह घटना दर्शाती है कि संघर्ष की आंच अब खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों तक पहुंच रही है।
ट्रंप का बयान और संभावित लंबी जंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बयान देते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है और जरूरत पड़ने पर इससे अधिक समय तक भी जारी रह सकता है। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से मिडिल ईस्ट क्षेत्र छोड़ने की अपील की और संकेत दिया कि “सबसे बड़ा हमला अभी बाकी है।”
ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा।
वैश्विक चिंता और कूटनीतिक प्रयास
गोलिस्तान महल जैसे ऐतिहासिक स्थल पर हमले ने सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है। कई देशों ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है।
फिलहाल मिडिल ईस्ट की स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। लगातार हो रहे हमलों, बढ़ती मौतों और संभावित विस्तार के खतरे ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। आने वाले दिनों में सैन्य और कूटनीतिक घटनाक्रम ही तय करेंगे कि यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
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