अमेरिकी राष्ट्रपति बोले—भारत जानता था कि रूसी तेल खरीद पर मैं नाखुश हूं
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात में कटौती को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रम्प ने कहा है कि भारत ने यह कदम उन्हें खुश करने के लिए उठाया। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वे रूस से तेल खरीद को लेकर नाखुश हैं, इसलिए भारत ने आयात कम करने का फैसला किया। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद और ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है।
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार बनकर उभरा था। उस समय पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे और अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाया था कि वह रूस से तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन पर हो रहे हमलों को फंड कर रहा है। इसी पृष्ठभूमि में ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ भी लगाए थे।
चार साल बाद रूस से तेल आयात में गिरावट
भारत ने वर्ष 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय कटौती की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में भारत का रूसी तेल आयात करीब 17.7 लाख बैरल प्रति दिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन रह गया। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह आंकड़ा 10 लाख बैरल प्रति दिन से भी नीचे जा सकता है।
जनवरी के आंकड़ों में रूसी तेल आयात में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। इसकी एक बड़ी वजह नवंबर 2021 से रूस की प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध हैं। इन प्रतिबंधों के बाद भारत के लिए रूस से तेल खरीदना पहले जितना आसान और किफायती नहीं रहा।
ट्रम्प का दावा और राजनीतिक संकेत
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि भारत ने रूस से तेल आयात घटाकर यह संकेत दिया है कि वह अमेरिका की चिंताओं को गंभीरता से लेता है। ट्रम्प के मुताबिक, “मोदी जानते थे कि मैं इस मुद्दे पर खुश नहीं हूं, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया।” ट्रम्प का यह बयान कूटनीतिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भारत-अमेरिका संबंधों और चल रही व्यापार वार्ताओं से जुड़ा है।
रूस ने घटाई छूट, भारत का फायदा कम हुआ
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने अपने कच्चे तेल पर भारी छूट दी थी। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जबकि रूस 20 से 25 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता क्रूड बेच रहा था। यह भारत जैसे आयातक देशों के लिए बेहद फायदेमंद था। हालांकि अब हालात बदल चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 63 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। इसके साथ ही रूस ने भी अपनी छूट घटाकर केवल 1.5 से 2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है। इतनी कम रियायत में भारत को पहले जैसा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा। इसके अलावा रूस से तेल मंगाने में शिपिंग और बीमा लागत भी अधिक पड़ती है, जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है।
/swadeshjyoti/media/post_attachments/web2images/521/2026/01/05/db-cover-size-11_1767581359-882095.png)
भारत ने बदले सप्लायर, स्थिर विकल्पों की ओर रुख
रूस से मिलने वाला आर्थिक लाभ कम होने के बाद भारत ने फिर से स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर्स की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। भारत अब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से अधिक तेल खरीद रहा है। इन देशों से तेल आपूर्ति न केवल स्थिर है, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक जोखिम भी अपेक्षाकृत कम हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अब जब कीमतों में बड़ा अंतर नहीं रह गया है, तो भारत के लिए रूस से तेल खरीदने का जोखिम उठाना व्यावहारिक नहीं है।
भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ का दबाव
अमेरिका अब तक भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुका है। इसमें 25 प्रतिशत ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ और 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया है। इन टैरिफ्स के चलते भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका असर पड़ा है।
भारत और अमेरिका के बीच इस टैरिफ विवाद को सुलझाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत जारी है। भारत की कोशिश है कि कुल टैरिफ को घटाकर 15 प्रतिशत किया जाए और रूसी तेल खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनाल्टी टैरिफ को पूरी तरह समाप्त कराया जाए।
नए साल में हो सकता है बड़ा फैसला
दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि नए साल में कोई ठोस समाधान निकल सकता है। जानकारों का मानना है कि भारत द्वारा रूस से तेल आयात में कटौती अमेरिका के साथ संबंध सुधारने और टैरिफ विवाद सुलझाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम हो सकता है।
ट्रम्प का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि अमेरिका भारत के इस कदम को सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि क्या इस फैसले से भारत को टैरिफ में राहत मिलती है या नहीं।
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/01/05/modi-trump-2026-01-05-12-19-32.jpg)