बसंत पंचमी पर हिंदू पूजा और शुक्रवार को नमाज की इजाजत, प्रशासन को सख्त कानून-व्यवस्था के निर्देश
नई दिल्ली। धार की विवादित भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए संतुलन बनाने का प्रयास किया है। शीर्ष अदालत ने बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक प्रार्थना करने की अनुमति दी है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को भी शुक्रवार के दिन दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि दोनों समुदाय आपसी सम्मान और सहयोग बनाए रखें, ताकि किसी तरह की तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न न हो।
प्रशासन को शांति बनाए रखने की सख्त हिदायत
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि भोजशाला जैसे संवेदनशील स्थल पर किसी भी प्रकार की चूक गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए प्रशासन को पूरी सतर्कता के साथ काम करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि धार्मिक गतिविधियों के दौरान शांति और सौहार्द सर्वोपरि होना चाहिए।
जिला प्रशासन को पास जारी करने का सुझाव
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई में कहा कि शुक्रवार को नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या पहले ही जिला प्रशासन को बता दी जाए। अदालत ने निर्देश दिया कि यह जानकारी उसी दिन प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। पीठ ने यह भी कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन पास जारी करने या कोई अन्य प्रभावी व्यवस्था लागू कर सकता है।
धार में कड़े सुरक्षा इंतजाम
सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला विवाद पर सुनवाई के मद्देनजर धार जिले में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। धार में आठ हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल लगाया गया है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। पुलिस द्वारा पूरे जिले में नियमित पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि किसी भी स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।
भोजशाला परिसर में विशेष निगरानी
भोजशाला परिसर को विशेष सुरक्षा घेरे में रखा गया है। यहां वॉच टावर बनाए गए हैं, पुलिस चौकी स्थापित की गई है और प्रवेश-निकास बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेशों का पालन करते हुए दोनों समुदायों को धार्मिक गतिविधियां करने की सुविधा दी जाएगी, लेकिन किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या उकसावे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संतुलन और सौहार्द पर सुप्रीम कोर्ट का जोर
धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी साफ संकेत देती है कि अदालत धार्मिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को समान रूप से महत्व दे रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन की भूमिका इस बात पर टिकी होगी कि वह अदालत के निर्देशों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है।
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