शिवाजी महाराज का जीवन स्वराज, स्वधर्म और स्वभाषा की अमर प्रेरणा: अमित शाह 

नई दिल्ली। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज का संकल्प, शौर्य और राष्ट्रभक्ति आज भी देश को प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने अल्पायु में ही हिंदवी स्वराज की स्थापना का जो संकल्प लिया, वह केवल एक राजनीतिक विचार नहीं था, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को जागृत करने का महान अभियान था।

अमित शाह ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्र के कण-कण में स्वधर्म, स्वराज और स्वभाषा के लिए जीने-मरने की अमर जिजीविषा उत्पन्न की। उन्होंने समाज के हर वर्ग को संगठित कर एक ऐसी विशाल और अनुशासित सेना का निर्माण किया, जिसका ध्येय राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा था। शाह ने कहा कि इतिहास में ऐसी दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और अकल्पनीय रणनीति बिरले ही देखने को मिलती है।

घोर पराधीनता के समय जन्मा स्वराज का विचार

अमित शाह ने अपने भाषण के अंश साझा करते हुए कहा कि जिस समय शिवाजी महाराज का जन्म हुआ, उस समय देश घोर अंधकार में डूबा हुआ था। चारों ओर मुगलशाही, अधीनशाही और निजामशाही का प्रभाव था। ऐसे वातावरण में स्वराज की कल्पना करना भी कठिन था। लेकिन मात्र 12 वर्ष की आयु में एक बालक ने यह संकल्प लिया कि वह सिंधु से कन्याकुमारी तक भगवा ध्वज फहराएगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक नायकों के जीवन चरित्र पढ़ने के बाद भी समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर एक अपराजित शक्ति खड़ी करने का उदाहरण शिवाजी महाराज जैसा दुर्लभ है। उन्होंने किसानों, युवाओं और साधारण जनमानस को संगठित कर आत्मगौरव का संचार किया।

हिंदवी स्वराज का विस्तार और जनजागरण

अमित शाह ने कहा कि देखते-देखते महाराष्ट्र, जो चारों ओर से शासकों के प्रभाव में घिरा था, हिंदवी स्वराज में परिवर्तित हो गया। कुछ ही वर्षों में स्वराज की भावना अटक से कटक और दक्षिण के तमिलनाडु तक फैलती दिखाई दी। यह केवल भू-भाग का विस्तार नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण था।

उन्होंने कहा कि जब शिवाजी महाराज की सेना विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँची, तब लोगों को यह विश्वास हुआ कि उनका स्वधर्म, उनकी भाषाएँ और उनकी संस्कृति सुरक्षित है। यही विश्वास किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होता है।

मुगलशाही को चुनौती और स्वतंत्रता का संदेश

अमित शाह ने कहा कि लगभग दो सौ वर्षों से चली आ रही मुगलशाही को चुनौती देने का साहस शिवाजी महाराज ने दिखाया। उन्होंने स्वराज का मंत्र देकर यह सिद्ध किया कि यदि नेतृत्व दृढ़ हो और संकल्प अटल हो, तो पराधीनता की जंजीरें टूट सकती हैं।

उन्होंने कहा कि एक बालक ने अपने साहस और रणनीति के बल पर पूरे देश को स्वराज का संदेश दिया। यह संघर्ष केवल शासन परिवर्तन का नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की रक्षा का था।

100 वर्ष की स्वतंत्रता की ओर बढ़ता भारत

अमित शाह ने कहा कि आज देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण कर विश्व के सामने आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि जब स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे, तब भारत विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भारत की मूलकल्पना शिवाजी महाराज ने ही रखी थी।

उन्होंने यह भी कहा कि शिवाजी महाराज का अंतिम संदेश था कि स्वराज की लड़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए और स्वधर्म व स्वभाषा के सम्मान की रक्षा का संघर्ष निरंतर जारी रहना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह संकल्प और अधिक सशक्त हुआ है।

अमित शाह ने आह्वान किया कि शिवाजी महाराज के आदर्शों को देश के प्रत्येक बच्चे तक पहुँचाना हम सबका दायित्व है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनके त्याग, पराक्रम और राष्ट्रप्रेम से प्रेरणा ले सकें।