ढाका के बाद खुलना में गोलीकांड, उस्मान हादी हत्याकांड के बाद हालात और बिगड़े

नई दिल्ली। बांग्लादेश एक बार फिर गंभीर राजनीतिक हिंसा की चपेट में आ गया है। इंकलाब मंच के प्रवक्ता और कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद जिस तरह से राजधानी ढाका और अन्य इलाकों में हिंसक प्रदर्शन भड़के थे, उसी कड़ी में अब एक और हाई-प्रोफाइल गोलीबारी की घटना सामने आई है। इस ताजा घटना ने पड़ोसी देश की कानून-व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं और यह संकेत दिया है कि हालात अभी सामान्य होने से काफी दूर हैं।

बीएनपी नेता पर जानलेवा हमला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने छात्र नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता पर हमला किया है। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के खुलना डिविजनल हेड मोतालेब सिकदर को सोमवार को सिर में गोली मारी गई। गोली उनके सिर के बाईं ओर लगी, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनकी हालत को लेकर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

अज्ञात हमलावर, साजिश की आशंका

हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद तेजी से फरार हो गए। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमला किस मकसद से किया गया और इसके पीछे कौन सा गुट सक्रिय है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला बांग्लादेश में गहराते राजनीतिक टकराव और बढ़ती असहिष्णुता का नतीजा हो सकता है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

हिंसा की आग में झुलसता बांग्लादेश

गौरतलब है कि बांग्लादेश पिछले कुछ समय से लगातार हिंसा और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। पिछले हफ्ते कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पूरे देश में उग्र विरोध प्रदर्शन हुए थे। ढाका सहित कई शहरों में तोड़फोड़, आगजनी और झड़पों की खबरें सामने आई थीं। उस्मान हादी अपनी भारत-विरोधी बयानबाजी के लिए जाना जाता था और वर्ष 2024 में हुए छात्र विद्रोह के दौरान वह काफी चर्चा में आया था।

छात्र राजनीति और सियासी टकराव

बांग्लादेश में छात्र राजनीति लंबे समय से सत्ता संघर्ष का अहम हिस्सा रही है। हालिया घटनाओं में छात्र नेतृत्व वाले संगठनों और मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के बीच टकराव और तेज हुआ है। उस्मान हादी की हत्या के बाद से यह टकराव खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। मोतालेब सिकदर पर हुआ हमला इसी तनावपूर्ण माहौल का परिणाम माना जा रहा है, जहां राजनीतिक मतभेद हिंसक रूप ले रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

एक के बाद एक हो रही हिंसक घटनाओं ने बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। हाई-प्रोफाइल नेताओं पर हमले से आम जनता में डर का माहौल है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकार स्थिति को काबू में कर पाएगी या आने वाले दिनों में हिंसा और भड़क सकती है।

क्षेत्रीय अस्थिरता की चिंता

बांग्लादेश में बढ़ती राजनीतिक हिंसा का असर केवल देश के भीतर तक सीमित नहीं है। क्षेत्रीय स्तर पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। भारत सहित पड़ोसी देश हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि लंबे समय तक अस्थिरता रहने से सीमा सुरक्षा, व्यापार और कूटनीतिक रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। फिलहाल बांग्लादेश की राजनीति एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है। उस्मान हादी की हत्या के बाद शुरू हुआ हिंसा का सिलसिला अब बीएनपी नेता पर गोलीबारी तक पहुंच चुका है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस बिगड़ते हालात को संभाल पाती हैं या नहीं।