सरयू स्नान, दान-पुण्य और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अयोध्या में भक्तिमय उत्सव
अयोध्या।अयोध्या में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। राम नगरी में भोर से ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और सुबह चार बजे से ही सरयू नदी के घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने वालों की लंबी कतारें दिखीं। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़, अन्न और वस्त्र का दान कर पुण्य अर्जित किया।
राम मंदिर में विशेष पूजन, रामलला को भेंट की गई पतंग
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर राम मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न इस पूजा में भक्तों की ओर से रामलला को पतंग अर्पित की गई, जिससे पर्व की पारंपरिक भावना साकार हुई। मंदिर परिसर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। पूजा के उपरांत रामलला को विशेष भोग अर्पित किया गया। बताया गया कि मकर संक्रांति के अनुरूप पारंपरिक प्रसाद तैयार कर श्रद्धा के साथ चढ़ाया गया, ताकि पर्व की पवित्रता और लोकपरंपराओं का समन्वय बना रहे।
सरयू घाटों पर उमड़ी आस्था, दान-पुण्य का सिलसिला
पर्व के अवसर पर सरयू के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। स्नान के बाद भक्तों ने जरूरतमंदों को दान दिया और फिर रामलला के दर्शन के लिए मंदिर की ओर प्रस्थान किया। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे—सभी में उत्साह दिखाई दिया। ठंड के बीच धूप निकलते ही घाटों पर रौनक और बढ़ गई।
प्रशासन की पुख्ता व्यवस्था
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए थे। घाटों और मंदिर मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहा, भीड़ प्रबंधन के लिए बैरिकेडिंग की गई और स्वास्थ्य सेवाएं भी मुस्तैद रहीं। प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखी, जिससे स्नान और दर्शन सुचारु रूप से सम्पन्न हो सके।
लोकआस्था और परंपरा का संगम
अयोध्या में मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं, बल्कि लोकआस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई। पतंग अर्पण, विशेष भोग और सरयू स्नान ने इस उत्सव को विशिष्ट बना दिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि रामलला के दर्शन और सरयू स्नान के साथ पर्व मनाने से आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव हुआ।
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