गांधीनगर में दूषित पानी से फैले 100 से अधिक मामले, पाइपलाइन मरम्मत और इलाज के दिए तत्काल निर्देश

नई दिल्ली। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दूषित पेयजल के कारण टायफाइड के मामलों में अचानक बढ़ोतरी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री और गांधीनगर से सांसद अमित शाह ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हालात से निपटने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जाए। उन्होंने पाइपलाइन लीकेज की तत्काल मरम्मत, प्रभावित क्षेत्रों में गहन निगरानी और मरीजों को त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।

गुजरात सरकार के मुताबिक गांधीनगर में अब तक टायफाइड के 113 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 19 मरीजों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि 94 मरीज अभी भी गांधीनगर सिविल अस्पताल और सेक्टर 24 व 29 के स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती हैं। राहत की बात यह है कि सभी मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

लगातार निगरानी में रहे अमित शाह

अमित शाह ने उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, जिला कलेक्टर और नगर आयुक्त के साथ लगातार संपर्क में रहकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। रविवार को उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टेलीफोन पर चर्चा की और निर्देश दिए कि टायफाइड से प्रभावित बच्चों और नागरिकों को बिना किसी देरी के सही और प्रभावी उपचार मिले।

शाह ने साफ कहा कि बीमारी के स्रोत को खत्म करना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके तहत उन्होंने जल आपूर्ति लाइनों में पाए गए लीकेज की तुरंत मरम्मत, दूषित जल स्रोतों की पहचान और प्रभावित इलाकों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाने के आदेश दिए।

प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे ओपीडी

प्रशासन ने हालात को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे ओपीडी सेवाएं शुरू कर दी हैं, ताकि मरीजों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके। सिविल अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार मरीजों की निगरानी कर रही हैं और नए मामलों पर नजर रखी जा रही है।

75 स्वास्थ्य टीमों ने संभाला मोर्चा

सरकार के अनुसार टायफाइड के बढ़ते मामलों को देखते हुए गांधीनगर में 75 स्वास्थ्य टीमों को मैदान में उतारा गया है। इन टीमों ने अब तक 20,800 से अधिक घरों का सर्वे किया है और करीब 90,000 लोगों को कवर किया गया है। सर्वे के दौरान बुखार, उल्टी-दस्त और अन्य लक्षणों वाले लोगों की पहचान कर उन्हें तुरंत इलाज के लिए भेजा जा रहा है।

क्लोरीन टैबलेट और ओआरएस का वितरण

रोकथाम के उपायों के तहत प्रशासन ने बड़े पैमाने पर दवाइयों और आवश्यक सामग्री का वितरण किया है। अब तक 30,000 क्लोरीन टैबलेट और 20,600 ओआरएस पैकेट बांटे जा चुके हैं। सर्वेक्षण टीमें घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं और उन्हें पानी उबालकर पीने, बाहर का खाना न खाने और हाथों की स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दे रही हैं।

पानी की ‘सुपर क्लोरीनेशन’ प्रक्रिया तेज

बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में पानी की “सुपर क्लोरीनेशन” प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। नगर निगम की टीमों ने कई इलाकों में पाइपलाइन की जांच की, जहां कुछ जगहों पर लीकेज पाए गए। इन लीकेज की तुरंत मरम्मत कराई गई है, ताकि दूषित पानी की आपूर्ति रोकी जा सके।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टायफाइड जैसी बीमारी दूषित पानी से तेजी से फैलती है, इसलिए जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करना सबसे अहम है। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि न केवल मौजूदा मामलों पर काबू पाया जाए, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

अमित शाह के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड में है। आने वाले दिनों में सर्वे, सैंपलिंग और मरम्मत कार्य और तेज किए जाने की संभावना है, ताकि गांधीनगर में हालात पूरी तरह नियंत्रण में लाए जा सकें।