शिक्षक भर्ती घोटाले में तृणमूल विधायक जीवनकृष्ण साहा की 14 दिन की न्यायिक हिरासत
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर लगातार सुर्खियों में है। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बड़त्रा से विधायक जीवनकृष्ण साहा को शनिवार को बैंकशाल अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इस दौरान अदालत परिसर में बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले, जब साहा अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे से मिले।
अदालत में फूट-फूटकर रो पड़े विधायक
कोर्ट कक्ष में जैसे ही विधायक साहा की नजर अपने बेटे और पत्नी पर पड़ी, उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने बेटे को गले लगाकर गाल थपथपाए और कुछ देर तक खामोश खड़े रहे। इसके बाद वे फूट-फूटकर रो पड़े। अदालत के आदेश के अनुसार अब उन्हें 12 सितंबर तक जेल हिरासत में रहना होगा।

ईडी की छह दिन की हिरासत पूरी होने के बाद पेशी
विधायक साहा को इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छह दिन की हिरासत में रखा गया था। हिरासत खत्म होने पर शनिवार को उन्हें बैंकशाल अदालत लाया गया। अदालत में पेशी से पहले उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
कोर्ट में पेशी के दौरान साहा ने उस आरोप को खारिज किया कि उन्होंने अपना मोबाइल फोन तालाब में फेंका था। उन्होंने मीडिया से कहा कि यह पूरी तरह से गलत आरोप है और उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश की जा रही है।
ईडी का आरोप – अवैध धन से खरीदे आलू बांड
ईडी ने अदालत में दावा किया कि विधायक साहा ने शिक्षक भर्ती घोटाले से अर्जित अवैध धन से ‘आलू बांड’ खरीदे। एजेंसी ने कहा कि इस संबंध में और पूछताछ जरूरी है, इसलिए साहा को न्यायिक हिरासत में भेजा जाना चाहिए।
हालांकि, साहा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनकी सारी संपत्ति वैध व्यवसाय से अर्जित है और उनका किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से कोई संबंध नहीं है।
विधायक के वकील ने जमानत नहीं मांगी
साहा की ओर से वकील जाकिर हुसैन अदालत में पेश हुए। उन्होंने जमानत की अर्जी दाखिल नहीं की। उनका कहना था कि इस मामले में अन्य आरोपितों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, लेकिन साहा को बार-बार अदालत में पेश कर हिरासत में भेजा जा रहा है।
अदालत का आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने विधायक साहा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब उन्हें 12 सितंबर तक जेल में ही रहना होगा। अदालत ने कहा कि इस दौरान जांच एजेंसियां उनसे आवश्यक पूछताछ कर सकती हैं।
मामला क्यों है महत्वपूर्ण
शिक्षक भर्ती घोटाला पश्चिम बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। इस घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के कई नेता और अधिकारी जांच के दायरे में आ चुके हैं। विपक्ष लगातार राज्य सरकार और सत्ताधारी दल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाता रहा है। विधायक साहा की गिरफ्तारी और लंबी हिरासत से इस विवाद ने और भी तूल पकड़ लिया है।
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