August 30, 2025 10:59 AM

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ पर विवाद गहराया, स्वतंत्रता सेनानी के पोते ने दर्ज कराई नई एफआईआर

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विवेक अग्निहोत्री की ‘द बंगाल फाइल्स’ पर नई एफआईआर, स्वतंत्रता सेनानी के पोते ने जताई आपत्ति

कोलकाता। फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की आगामी फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ एक बार फिर विवादों में घिर गई है। स्वतंत्रता सेनानी गोपाल मुखर्जी उर्फ गोपाल पाठा के पोते संतना मुखर्जी ने फिल्म में अपने दादा के चरित्र को विकृत और गलत रूप में पेश किए जाने का आरोप लगाते हुए नई एफआईआर दर्ज कराई है।

परिवार की आपत्ति: दादा को गलत तरीके से दिखाने का आरोप

संतना मुखर्जी ने आरोप लगाया कि फिल्म में उनके दादा को ‘कसाई’ के रूप में दिखाया गया है, जो ऐतिहासिक तथ्यों के पूरी तरह विपरीत है। उन्होंने कहा कि गोपाल मुखर्जी वास्तव में अनुशीलन समिति के सदस्य थे, कुश्ती में निपुण थे और 1946 के दंगों में मुस्लिम लीग की हिंसा से लोगों की रक्षा के लिए हथियार उठाए थे। हालांकि वे दो मांस की दुकानों के मालिक थे, लेकिन उन्हें ‘कसाई’ कहना ऐतिहासिक सत्य से छेड़छाड़ है।

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माताओं ने परिवार से बिना अनुमति लिए ही उनके दादा का चरित्र शामिल किया, जो आपत्तिजनक और असंवैधानिक है।

पहले भी दर्ज हो चुकी हैं एफआईआर

यह पहली बार नहीं है कि ‘द बंगाल फाइल्स’ विवादों में आई हो। इससे पहले जुलाई में मुर्शिदाबाद जिले और कोलकाता के लेक टाउन थाने में भी एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि फिल्म में ऐसे संवेदनशील दृश्य शामिल किए गए हैं, जो बंगाल की सांप्रदायिक सद्भावना को बिगाड़ सकते हैं।

अदालत में मामला लंबित

विवेक अग्निहोत्री और उनकी पत्नी व अभिनेत्री पल्लवी जोशी ने 31 जुलाई को इन एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। 4 अगस्त को न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की पीठ ने इन एफआईआर पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

‘फाइल्स ट्रिलॉजी’ का तीसरा हिस्सा

‘द बंगाल फाइल्स’ विवेक अग्निहोत्री की चर्चित ‘फाइल्स ट्रिलॉजी’ का तीसरा भाग है। इससे पहले उनकी ‘द ताशकंद फाइल्स’ (2019) और ‘द कश्मीर फाइल्स’ (2022) रिलीज होकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का कारण बनी थीं। अब ‘द बंगाल फाइल्स’ को लेकर भी विवाद गहराने लगा है।

राजनीतिक गलियारों में इस विवाद को ममता बनर्जी सरकार की रुख से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इससे पहले भी पश्चिम बंगाल सरकार पर फिल्मों और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर रोक लगाने के आरोप लगते रहे हैं।



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