August 30, 2025 10:54 AM

तेजस्वी यादव पर मुकदमा: प्रधानमंत्री मोदी पर अभद्र टिप्पणी का मामला गरमाया

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तेजस्वी यादव पर मुकदमा: प्रधानमंत्री मोदी पर अभद्र टिप्पणी के आरोप में एफआईआर


ललितपुर। बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला उत्तर प्रदेश के ललितपुर ज़िले के तालबेहट कोतवाली थाने में दर्ज हुआ है। शिकायतकर्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिलाध्यक्ष हरिश्चंद्र रावत हैं, जिन्होंने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।


शिकायत का आधार और एफआईआर दर्ज

भाजपा जिलाध्यक्ष हरिश्चंद्र रावत ने पुलिस को लिखित शिकायत दी कि उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से जानकारी मिली कि तेजस्वी यादव और अन्य लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। न केवल टिप्पणी की गई बल्कि प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाकर इसे पोस्ट भी किया गया।

शिकायतकर्ता ने इस पोस्ट की प्रति को साक्ष्य के रूप में पुलिस को सौंपा। तहरीर पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ धारा 504 (जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करना) और धारा 505 (जनता में भय या अशांति फैलाने वाले बयान) समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


राजनीतिक गलियारों में मचा हंगामा

जैसे ही यह खबर सामने आई, स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। भाजपा नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री के सम्मान पर हमला बताया और कहा कि इस तरह की राजनीति स्वीकार्य नहीं है। वहीं, राजद खेमे का कहना है कि यह कार्रवाई राजनैतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर की गई कोई भी टिप्पणी, खासकर संवेदनशील और शीर्ष पदों से जुड़े व्यक्तियों को लेकर, यदि आपत्तिजनक मानी जाती है तो वह न केवल कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित करती है बल्कि जनता के बीच राजनीतिक विवाद को भी जन्म देती है।


सोशल मीडिया और कानून

इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि नेताओं और राजनीतिक दलों को सोशल मीडिया पर कितनी सावधानी बरतनी चाहिए।

भारत के आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता में स्पष्ट प्रावधान हैं कि अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर अश्लील, आपत्तिजनक, भड़काऊ या मानहानि करने वाली पोस्ट करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। खासतौर पर जब बात प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदों की हो, तो ऐसे मामलों को अधिक गंभीरता से लिया जाता है।


तेजस्वी यादव और विवादों का रिश्ता

तेजस्वी यादव, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, अक्सर अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में रहते हैं। विपक्ष के नेता होने के नाते वे लगातार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखे हमले बोलते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला उनके लिए कानूनी दायरे में पहुँच गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी भी प्रकार की अभद्रता या व्यक्तिगत टिप्पणी नेताओं को कानूनी दिक्कतों में डाल सकती है।


भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा के स्थानीय और प्रदेश नेताओं ने तेजस्वी यादव पर दर्ज हुए मुकदमे का स्वागत किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल राष्ट्र के सम्मान को ठेस पहुँचाने जैसा है। भाजपा जिलाध्यक्ष हरिश्चंद्र रावत ने कहा,
“हमने लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी शिकायत दर्ज कराई है। प्रधानमंत्री देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणी पूरे देश का अपमान है।”


राजद की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, राजद नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार और उसके नेता विपक्ष की आवाज दबाने के लिए एफआईआर और मुकदमों का सहारा ले रहे हैं। राजद प्रवक्ताओं का आरोप है कि तेजस्वी यादव ने कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की बल्कि सरकार की नीतियों की आलोचना की थी, जिसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।


कानूनी प्रक्रिया आगे

पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस यह पता लगाएगी कि आपत्तिजनक पोस्ट किस हैंडल से किया गया और उसमें तेजस्वी यादव की प्रत्यक्ष भूमिका क्या है। साइबर सेल की मदद से पोस्ट की तकनीकी जांच भी कराई जाएगी।

अगर तेजस्वी यादव पर लगे आरोप साबित होते हैं तो उन्हें जमानत और कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। वहीं अगर आरोप निराधार पाए जाते हैं तो मामला कोर्ट में टिक नहीं पाएगा।


जनता की राय

घटना के बाद जनता की राय भी बंटी हुई है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि प्रधानमंत्री जैसे पद के खिलाफ अभद्र टिप्पणी किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।



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