August 30, 2025 10:21 PM

सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश: दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की तुरंत नसबंदी, स्थायी शेल्टर में रखने का आदेश

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की तुरंत नसबंदी और स्थायी शेल्टर में रखने के निर्देश

नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के सभी नगर निकायों को आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाले हमलों पर कड़ी चिंता जताते हुए तत्काल कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए। अदालत ने साफ कहा है कि अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जो भी व्यक्ति या संगठन इस प्रक्रिया में बाधा डालेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नसबंदी के बाद कुत्तों को सड़कों पर छोड़ने की मनाही

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने आदेश दिया कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) सभी इलाकों, विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को तत्काल पकड़ें। जरूरत पड़ने पर इसके लिए अलग विशेष बल (स्पेशल फोर्स) भी गठित की जाए। कोर्ट ने कहा कि नसबंदी के बाद किसी भी कुत्ते को दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए, बल्कि उन्हें स्थायी रूप से डॉग शेल्टर में रखा जाए।

28 जुलाई को स्वत: संज्ञान से शुरू हुई सुनवाई

यह मामला तब सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को संसद में पेश एक रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया। रिपोर्ट में बताया गया था कि दिल्ली-एनसीआर में रेबीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और आवारा कुत्तों के हमलों से बच्चों और बुजुर्गों की मौतें हो रही हैं। कोर्ट ने इसे “बेहद डराने वाला” और “गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट” बताया।

सुप्रीम कोर्ट के 5 अहम आदेश

  1. 8 हफ्तों में डॉग शेल्टर तैयार करें – पर्याप्त स्टाफ, सीसीटीवी और आवश्यक सुविधाओं के साथ स्थायी डॉग शेल्टर बनाए जाएं।
  2. 6 हफ्तों में 5,000 कुत्तों की पकड़ – संवेदनशील क्षेत्रों से शुरुआत कर बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान चलाएं।
  3. दैनिक रिकॉर्ड अनिवार्य – दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में रोज पकड़े जाने वाले कुत्तों का रिकॉर्ड रखा जाए, नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई हो।
  4. डॉग बाइट हेल्पलाइन एक हफ्ते में – डॉग बाइट और रेबीज मामलों के लिए 24×7 हेल्पलाइन शुरू हो, 4 घंटे के भीतर कार्रवाई हो और कुत्ते को नसबंदी के बाद न छोड़ा जाए।
  5. रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित – पर्याप्त स्टॉक रखा जाए और उसकी नियमित रिपोर्ट अदालत को दी जाए।

चौंकाने वाले आंकड़े

  • वर्ष 2024 में अब तक 37 लाख से अधिक डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से 5.19 लाख से ज्यादा पीड़ित 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे।
  • देशभर में रेबीज से 54 लोगों की मौत हुई।
  • डॉग बाइट के हर 7 पीड़ितों में 1 बच्चा शामिल है।
  • दिल्ली में डॉग बाइट के मामलों में 143% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में सामने आए।

मासूम की दर्दनाक मौत ने बढ़ाई चिंता

यह रिपोर्ट दिल्ली की 6 वर्षीय बच्ची छवि शर्मा की मौत से जुड़ी थी। 30 जून को एक आवारा कुत्ते ने उसे काट लिया था। इलाज के बावजूद 26 जुलाई को उसकी मौत हो गई। इस घटना ने राजधानी में आवारा कुत्तों के खतरे और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बहस तेज कर दी।

पहले भी जताई जा चुकी है सार्वजनिक सुरक्षा की चिंता

इससे पहले 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए तय स्थान की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि जो लोग कुत्तों को खाना देना चाहते हैं, वे अपने घर में दें। कोर्ट ने दोपहिया चालकों और सुबह टहलने वालों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई थी।

अदालत का संदेश – “ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं”

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ पशु कल्याण का मुद्दा नहीं है, बल्कि नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा का मामला है। इसलिए नगर निकायों, प्रशासन और पुलिस को मिलकर तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि आदेशों के पालन में जरा भी देरी या लापरवाही हुई, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।



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