संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की बदली जिम्मेदारी, मध्य क्षेत्र के सह बौद्धिक प्रमुख बनाए गए

भोपाल। मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक स्तर पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। प्रदेश संगठन महामंत्री के रूप में लंबे समय से जिम्मेदारी संभाल रहे Hitanand ji Sharma को अब नई भूमिका सौंपी गई है। पार्टी संगठन ने उन्हें मध्य क्षेत्र का सह बौद्धिक प्रमुख बनाया है, जिसमें उनका केंद्र जबलपुर रहेगा। यह बदलाव संगठनात्मक रणनीति के तहत किया गया माना जा रहा है, हालांकि इसे लेकर पार्टी की ओर से औपचारिक बयान नहीं आया है।

संगठनात्मक रणनीति के तहत लिया गया फैसला

सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव आगामी समय की संगठनात्मक जरूरतों और वैचारिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए किया गया है। हितानंद शर्मा मूल रूप से अशोकनगर जिले के निवासी हैं, जो चंबल क्षेत्र में आता है। संघ पृष्ठभूमि से जुड़े होने और लंबे समय तक वैचारिक संगठनों में काम करने के कारण पार्टी संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है। यही वजह है कि उन्हें अब संगठनात्मक के साथ-साथ बौद्धिक क्षेत्र में भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

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तीन प्रचारकों की जिम्मेदारी भी बदली

इस फेरबदल के तहत केवल हितानंद शर्मा ही नहीं, बल्कि तीन अन्य प्रचारकों की भूमिकाओं में भी बदलाव किया गया है। सुरेंद्र मिश्रा को पूर्व सैनिक सेवा परिषद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुकेश त्यागी अब ग्राहक पंचायत में कार्य संभालेंगे। वहीं ब्रजकिशोर भार्गव को क्षेत्र गो सेवा प्रमुख बनाया गया है। इन सभी बदलावों को संघ और संगठन के समन्वय से किया गया निर्णय माना जा रहा है।

नए संगठन महामंत्री को लेकर अटकलें तेज

हितानंद शर्मा की नई जिम्मेदारी तय होने के बाद प्रदेश में नए संगठन महामंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में कई नामों पर कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी की ओर से अब तक किसी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस पद को लेकर भी निर्णय सामने आ सकता है, क्योंकि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखना भाजपा की प्राथमिकता रहती है।

संघ से गहरा जुड़ाव और संगठन में अहम भूमिका

मध्यप्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री बनने से पहले हितानंद शर्मा सह संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। वर्ष 2020 में उन्हें प्रदेश सह संगठन महामंत्री बनाया गया था और 2022 में उन्होंने सुहास भगत के स्थान पर प्रदेश संगठन महामंत्री का पद संभाला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनके गहरे संबंध माने जाते हैं, विशेषकर ग्वालियर–चंबल अंचल में उनकी वैचारिक और संगठनात्मक पकड़ मजबूत रही है। संगठन के भीतर उन्हें अनुशासन, कैडर प्रबंधन और सूक्ष्म स्तर की योजना के लिए जाना जाता है।

तहसील प्रचारक से शीर्ष संगठन पद तक का सफर

हितानंद शर्मा का संगठनात्मक सफर लंबा और जमीनी रहा है। वे पहले तहसील प्रचारक, जिला प्रचारक और विभाग प्रचारक जैसे दायित्व निभा चुके हैं। इसके बाद उन्होंने लगभग दस वर्षों तक विद्या भारती के कार्यों को देखा और संभाला। विद्या भारती से सीधे भाजपा संगठन में आने के बाद उन्होंने संगठन महामंत्री सुहास भगत के साथ सह संगठन महामंत्री के रूप में काम किया और धीरे-धीरे शीर्ष संगठन पद तक पहुंचे।

चुनावी रणनीति में रहा अहम योगदान

हितानंद शर्मा के कार्यकाल को संगठन और चुनावी प्रबंधन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बूथ सशक्तिकरण अभियान के दौरान उन्होंने माइक्रो-लेवल पर जाकर तैयारियां कराईं। तकनीकी नवाचारों को जिस तरह संगठन में लागू किया गया, उसे भाजपा में एक नया प्रयोग माना गया। संगठन के अभियानों, मंडल स्तर तक प्रवास और कैडर के निरंतर संपर्क ने पार्टी को चुनावी रूप से मजबूत किया।

विधानसभा से लोकसभा तक जीत में बड़ी भूमिका

पार्टी सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में शानदार जीत और लोकसभा चुनाव में शत-प्रतिशत सफलता, यानी प्रदेश की सभी 29 सीटों पर विजय के पीछे हितानंद शर्मा की पर्दे के पीछे की रणनीति का बड़ा योगदान रहा। संगठन से जुड़े अभियानों की पूरी जानकारी उनके तकनीकी सिस्टम और मोबाइल नेटवर्क के जरिए लगातार अपडेट रहती थी, जिससे निर्णय तेजी से लिए जा सके।

आगे की भूमिका पर सबकी नजर

अब जब हितानंद शर्मा को मध्य क्षेत्र का सह बौद्धिक प्रमुख बनाया गया है, तो माना जा रहा है कि वे वैचारिक प्रशिक्षण, बौद्धिक कार्यक्रमों और संगठन की दीर्घकालिक रणनीति को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। वहीं, प्रदेश संगठन महामंत्री के नए चेहरे को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

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