भारत में स्टारलिंक और UIDAI की साझेदारी: आधार से जुड़ेगा सैटेलाइट इंटरनेट, गांवों तक पहुंचेगी हाई-स्पीड सुविधा
नई दिल्ली। भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं देने की तैयारी कर रही एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को केंद्र सरकार से एक और बड़ी मंजूरी मिल गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने बुधवार को घोषणा की कि यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) और स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत स्टारलिंक को सब-ऑथेंटिकेशन यूज़र एजेंसी (Sub-AUA) का दर्जा दिया गया है।
इस साझेदारी के बाद कंपनी अपने ग्राहकों का वेरिफिकेशन आधार आधारित ऑथेंटिकेशन सिस्टम से करेगी। इससे स्टारलिंक को नए कस्टमर को जोड़ने की प्रक्रिया तेज़ और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही कंपनी आसानी से नो योर कस्टमर (KYC) नियमों का पालन कर पाएगी।
भारत में स्टारलिंक की एंट्री की राह
स्टारलिंक 2022 से भारत में सेवाएं शुरू करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर सरकार ने कई शर्तें रखीं। इनमें डेटा सिक्योरिटी, कॉल इंटरसेप्शन और स्थानीय कानूनों के पालन जैसी बाध्यताएँ थीं। कंपनी ने सरकार की शर्तों को मानने में वक्त लिया, जिसके कारण अनुमति मिलने में देरी हुई।
अंततः मई 2025 में कंपनी को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया और इसके बाद जून 2025 में टेलीकॉम विभाग से सैटेलाइट इंटरनेट सेवा का लाइसेंस मिल गया। अब सिर्फ IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorization Centre) से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। उसके बाद स्टारलिंक भारत में आधिकारिक तौर पर सेवाएं शुरू कर सकेगी।

सैटेलाइट से इंटरनेट कैसे पहुंचेगा आपके घर?
स्टारलिंक का पूरा नेटवर्क धरती की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में घूम रहे हजारों छोटे सैटेलाइट्स पर आधारित है। ये सैटेलाइट्स धरती के किसी भी हिस्से से इंटरनेट सिग्नल को बीम करके सीधे यूजर्स के उपकरणों तक पहुंचाते हैं।
ग्राहकों को कंपनी की तरफ से स्टारलिंक किट दी जाएगी, जिसमें शामिल होंगे:
- एक स्टारलिंक डिश
- वाई-फाई राउटर
- पावर सप्लाई केबल्स
- माउंटिंग ट्राइपॉड
ग्राहक को सिर्फ इतना करना होगा कि डिश को खुले आसमान के नीचे सही दिशा में लगाना है। इसके बाद इंटरनेट कनेक्टिविटी तुरंत शुरू हो जाएगी। कंपनी का एक मोबाइल ऐप (iOS और एंड्रॉइड दोनों पर उपलब्ध) सेटअप और मॉनिटरिंग की सुविधा देता है।
स्टारलिंक दावा करती है कि उसके नेटवर्क से हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी इंटरनेट मिलेगा। लेटेंसी यानी डेटा को एक पॉइंट से दूसरे तक पहुंचने में लगने वाला समय। यह तकनीक खास तौर पर वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन गेमिंग और हाई-क्वालिटी स्ट्रीमिंग जैसी सेवाओं को निर्बाध बनाएगी।
आम लोगों को क्या फायदा होगा?
स्टारलिंक के भारत आने से सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूर-दराज़ क्षेत्रों को होगा, जहां अब तक इंटरनेट की पहुंच सीमित रही है। इस तकनीक से:
- ऑनलाइन शिक्षा ग्रामीण बच्चों तक आसानी से पहुंच सकेगी।
- टेलीमेडिसिन के ज़रिए गांवों में बैठे लोग बड़े शहरों के डॉक्टरों से इलाज ले पाएंगे।
- छोटे कस्बों और गांवों के व्यवसायों को डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ने में आसानी होगी।
- टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे ग्राहकों को सस्ते और बेहतर इंटरनेट प्लान्स मिल सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय
तकनीकी जानकारों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है। फिलहाल ब्रॉडबैंड और मोबाइल नेटवर्क कई बार ग्रामीण इलाकों तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट तकनीक से यह दूरी पाटी जा सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सेवा की शुरुआती कीमतें आम भारतीयों की जेब पर भारी पड़ सकती हैं।
स्टारलिंक और UIDAI की साझेदारी भारत में डिजिटल क्रांति को नई दिशा दे सकती है। आधार आधारित वेरिफिकेशन से जहां कंपनी की कस्टमर सर्विस तेज और सुरक्षित होगी, वहीं सैटेलाइट इंटरनेट से लाखों लोगों तक डिजिटल इंडिया का सपना पहुंच सकेगा।
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