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1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। ये भारत के अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं और प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग पौराणिक कथा और आध्यात्मिक महिमा है। मान्यता है कि इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजा से पापों का नाश, रोगों से मुक्ति और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर इनका स्मरण और रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है। 1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात) यह पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। चंद्रदेव ने यहां तप कर शिवजी को प्रसन्न किया था। मान्यता है कि यहां दर्शन से रोग और कष्ट दूर होते हैं।
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2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश)
यह श्रीशैल पर्वत पर स्थित है। यहां शिव और पार्वती दोनों की पूजा होती है। मनोकामना पूर्ण करने वाला तीर्थ माना जाता है।
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3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)
यह उज्जैन में स्थित है। यहां होने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
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4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)
नर्मदा नदी के मध्य द्वीप पर स्थित है। द्वीप का आकार ‘ॐ’ जैसा है। यहां दर्शन से पापों का नाश होता है।
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5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड)
हिमालय की गोद में स्थित है। कठिन यात्रा के बावजूद श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यह मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है।
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6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
सह्याद्रि पर्वत में स्थित है। मान्यता है कि यहां शिवजी ने त्रिपुरासुर का वध किया था।
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7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तर प्रदेश)
वाराणसी में गंगा तट पर स्थित है। यहां मृत्यु होने पर मोक्ष की प्राप्ति का विश्वास है।
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8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
नासिक के पास स्थित है। यहां से गोदावरी नदी का उद्गम होता है। पितृ दोष निवारण के लिए प्रसिद्ध है।
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10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
द्वारका के पास स्थित है। नागों से रक्षा करने वाले शिव के रूप की पूजा होती है।
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11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु)
मान्यता है कि यहां भगवान राम ने लंका जाने से पहले शिवलिंग स्थापित किया था। चार धामों में भी शामिल है।
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12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
यह एलोरा गुफाओं के पास स्थित है। इसे शिव भक्त घृष्णा की भक्ति के कारण स्थापित माना जाता है।
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