सेबी लाएगा प्री-आईपीओ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, डेरिवेटिव बाजार में सुधार की तैयारी
नई दिल्ली। भारतीय पूंजी बाजार के नियामक सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) निवेशकों और कंपनियों के बीच पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से बड़े कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत सेबी जल्द ही एक विनियमित प्री-आईपीओ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च कर सकता है, जहां कंपनियां अपनी शुरुआती सार्वजनिक पेशकश (IPO) से पहले कुछ अनिवार्य खुलासे करने के बाद निवेशकों को अपने शेयरों में कारोबार का अवसर दे सकेंगी। यह पहल अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होगी।
कंपनियों के लिए पारदर्शिता और निवेशकों के लिए सुरक्षा
फिक्की कैपिटल मार्केट कॉन्फ्रेंस 2025 को संबोधित करते हुए सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि अक्सर निवेशक आईपीओ में निवेश का निर्णय लेने से पहले पर्याप्त जानकारी नहीं जुटा पाते। ऐसे में यह नया प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपनी वित्तीय स्थिति, कारोबारी रणनीति और अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं का खुलासा करने का अवसर देगा। इससे निवेशकों को अधिक स्पष्ट जानकारी मिलेगी और वे सुविचारित निर्णय ले पाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि यह प्लेटफॉर्म उन उभरते क्षेत्रों, उत्पादों और परिसंपत्तियों को भी सामने लाएगा जो पूंजी की मांग और आपूर्ति का नया रास्ता खोल सकते हैं।
ग्रे मार्केट पर लग सकती है रोक
वर्तमान में आईपीओ आवंटन और लिस्टिंग के बीच तीन दिनों के अंतराल में अनियमित ग्रे मार्केट सक्रिय रहता है। यहां शेयरों की खरीद-फरोख्त बिना किसी निगरानी के होती है। पांडे ने संकेत दिया कि नया प्लेटफॉर्म इस ग्रे मार्केट की जगह ले सकता है और निवेशकों को एक विनियमित और सुरक्षित वातावरण में कारोबार करने की सुविधा देगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस प्रस्ताव पर डिपॉजिटरीज से चर्चा हुई है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विचार अभी सिद्धांत के स्तर पर है।

डेरिवेटिव बाजार में सुधार की तैयारी
सेबी अध्यक्ष ने कहा कि संस्था अब इक्विटी डेरिवेटिव उत्पादों की अवधि और परिपक्वता (maturity profile) को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। वर्तमान में भारतीय शेयर बाजार में नकदी कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और पिछले तीन वर्षों में यह दोगुना हो चुका है।
उन्होंने कहा कि डेरिवेटिव उत्पाद पूंजी निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि उनका उपयोग केवल अल्पकालिक सट्टेबाजी तक सीमित न रह जाए। इसलिए सेबी हितधारकों से परामर्श कर डेरिवेटिव्स को लंबी अवधि के निवेश और हेजिंग के लिए अधिक उपयोगी बनाने पर काम करेगा।
अल्पकालिक ट्रेडिंग पर चिंता
हाल ही में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण ने अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म डेरिवेटिव ट्रेडिंग के बढ़ते चलन पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि यदि यह प्रवृत्ति अनियंत्रित रही तो भारतीय पूंजी बाजार की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए डेरिवेटिव्स की अवधि और परिपक्वता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाना आवश्यक है।
निवेशकों और बाजार के लिए लाभकारी कदम
सेबी की इन पहलों को पूंजी बाजार विशेषज्ञ सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि प्री-आईपीओ प्लेटफॉर्म जहां निवेशकों को सुरक्षित वातावरण और स्पष्ट जानकारी देगा, वहीं कंपनियों को पारदर्शिता के साथ धन जुटाने का नया माध्यम उपलब्ध कराएगा। दूसरी ओर, डेरिवेटिव्स में सुधार लंबे समय के निवेशकों के लिए बाजार को अधिक स्थिर और आकर्षक बनाएगा।
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