मार्केट कैप 7.43 लाख करोड़ पहुंचा, ब्याज आय में 6% की बढ़ोतरी
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 19,160 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। यह लाभ पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले 12% अधिक है। इससे पहले अप्रैल-जून 2024 की तिमाही में बैंक को 17,035 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। इस बढ़े हुए मुनाफे के पीछे मुख्य कारण बैंक की ब्याज आय में वृद्धि और फंसे कर्जों (NPA) में गिरावट को माना जा रहा है।

ब्याज से होने वाली आय में 6% की वृद्धि
SBI की ब्याज आय (Interest Income) पहली तिमाही में बढ़कर 1.18 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 1.12 लाख करोड़ रुपए थी। यानी बैंक को 6% ज्यादा ब्याज आय हुई। यह इस बात का संकेत है कि बैंक की कर्ज वितरण प्रणाली मजबूत बनी हुई है और ग्राहक समय पर ब्याज चुका रहे हैं।
NPA में राहत: नेट NPA 8% गिरा
बैंक के लिए राहत की बात यह है कि उसके नेट NPA यानी शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (Non-Performing Assets) इस तिमाही में 8% कम होकर 19,908 करोड़ रुपए रह गई हैं। पिछली समान अवधि में यह आंकड़ा 21,555 करोड़ रुपए था।
NPA वह स्थिति होती है, जब किसी ग्राहक द्वारा बैंक से लिया गया कर्ज या उसका ब्याज 90 दिनों से अधिक समय तक न चुकाया जाए। इससे बैंक को नुकसान होता है क्योंकि उस राशि की वसूली अनिश्चित हो जाती है।
क्या होता है स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट?
बैंक ने जो मुनाफा घोषित किया है, वह स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट है। इसका मतलब है कि यह लाभ केवल SBI के अपने कारोबार से आया है, उसकी सब्सिडियरी कंपनियों को मिलाकर नहीं। जब सभी सहायक कंपनियों के साथ मिलाकर मुनाफा बताया जाता है, तो उसे कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट कहा जाता है।

शेयर बाजार में हल्की गिरावट, लेकिन 6 महीने का प्रदर्शन बेहतर
हालांकि शानदार तिमाही नतीजों के बावजूद 8 अगस्त शुक्रवार को SBI के शेयर में गिरावट देखी गई। दोपहर 2:40 बजे इसका शेयर 805 रुपए पर कारोबार कर रहा था। पिछले एक महीने में यह 1% और एक साल में 0.5% गिर चुका है। हालांकि पिछले 6 महीने में इसमें 9% की तेजी रही है।
SBI बना देश की छठी सबसे बड़ी कंपनी
ताजा आंकड़ों के अनुसार, SBI का मार्केट कैपिटलाइजेशन 7.43 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है, जिससे यह वैल्यूएशन के लिहाज से भारत की छठी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर शीर्ष पांच कंपनियों में निजी क्षेत्र की टेक और ऑटो कंपनियों का दबदबा रहता है।
SBI: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना 1 जुलाई 1955 को हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में है। यह न सिर्फ भारत का बल्कि एशिया का भी एक प्रमुख बैंक है। वर्तमान में इसकी 22,500 से ज्यादा शाखाएं हैं और 50 करोड़ से अधिक ग्राहक इसके साथ जुड़े हुए हैं। बैंक की वैश्विक उपस्थिति भी मजबूत है – दुनिया के 29 देशों में इसकी कुल 241 शाखाएं कार्यरत हैं।
सरकार की हिस्सेदारी और बैंक की भूमिका
SBI में केंद्र सरकार की 57.59% हिस्सेदारी है, जिससे यह पूरी तरह एक सरकारी बैंक बनता है। यह बैंक देश की आर्थिक रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि यह आम नागरिकों से लेकर उद्योगों तक को ऋण और बैंकिंग सेवाएं प्रदान करता है।
SBI ने वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ मुनाफा कमाया है, बल्कि अपने डूबते कर्जों (NPA) को भी कम किया है। इससे बैंक की बैलेंस शीट मजबूत हुई है और यह निवेशकों के लिए भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरा है। हालांकि शेयर बाजार में हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रदर्शन और मजबूत आधारभूत ढांचे को देखते हुए विशेषज्ञ इसका भविष्य उज्ज्वल मान रहे हैं।
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